दैनिक खबरनामा|जालंधर, 14 जून 2026. संगठित आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस ने उद्योग संगठन फिक्की कैस्केड (FICCI CASCADE) के सहयोग से पुलिस अधिकारियों के लिए एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को तस्करी और नकली उत्पादों के अवैध कारोबार से निपटने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रक्रियागत जानकारी प्रदान करना था।

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर में आयोजित इस आधे दिन के प्रशिक्षण सेमिनार में राज्यभर से 60 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन विशेष पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) अमरदीप सिंह राय ने किया। उन्होंने कहा कि तस्करी और नकली सामान का कारोबार न केवल वैध व्यापार और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया।

पंजाब सरकार के अतिरिक्त सचिव (गृह मामले) अंकुरजीत सिंह ने कहा कि अवैध व्यापार के तौर-तरीके लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं, जिसके मद्देनजर पुलिस की सक्रिय भूमिका और सशक्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो गई है।

जेल विभाग के सचिव मोहम्मद तैयब ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस की सतर्कता और निरंतर निगरानी को महत्वपूर्ण बताया।

फिक्की कैस्केड के सलाहकार एवं दिल्ली के पूर्व विशेष पुलिस आयुक्त दीप चंद ने नकली उत्पादों और तस्करी के व्यापक आर्थिक एवं सामाजिक दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों को ट्रेडमार्क अधिनियम 1999, कॉपीराइट अधिनियम 1957 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उद्योग जगत का पक्ष रखते हुए आईटीसी के कॉर्पोरेट मामलों के उपाध्यक्ष आशीष पाल ने तस्करी और नकली सिगरेटों के बढ़ते कारोबार को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को भारी राजस्व हानि होती है, वैध ब्रांडों की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है और उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर पड़ता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तस्करी से अर्जित धन का उपयोग कई बार गैरकानूनी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. ऋषि कुलश्रेष्ठ ने जांच प्रक्रिया में कानूनी एवं प्रक्रियागत मानकों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोषियों को न्यायालय में कठोर दंड दिलाने के लिए जांच के प्रत्येक चरण में निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है।

विशेषज्ञों ने इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों को तस्करी और जालसाजी के मामलों की प्रभावी जांच, साक्ष्य संकलन तथा अभियोजन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी।

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