दैनिक खबरनामा | 15 जून, 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों के बाद वैश्विक और घरेलू बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से दबाव में चल रही कीमती धातुओं में निवेशकों की खरीदारी लौटने से दोनों धातुओं के भाव मजबूत हुए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने हालिया निचले स्तर से करीब 7.6 प्रतिशत बढ़कर 4,331 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया है। वहीं चांदी में और अधिक तेजी देखने को मिली, जिसके भाव 15.1 प्रतिशत उछलकर 70.55 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब दोनों धातुओं में मजबूती बनी हुई है।
घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर भी तेजी का माहौल रहा। अगस्त 2026 डिलीवरी वाले सोना वायदा भाव 3,301 रुपये बढ़कर 1,53,829 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। वहीं जुलाई 2026 डिलीवरी वाली चांदी 7,200 रुपये की तेजी के साथ 2,53,345 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। पिछले तीन दिनों में सोने में लगभग 6,000 रुपये और चांदी में 18,000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ समझौते की संभावना से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य रूप से संचालित होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है, जिसके कारण वैश्विक महंगाई घटने और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कमजोर हुई है। यह स्थिति सोना और चांदी जैसे निवेश विकल्पों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित समझौते में ईरान को कुछ प्रतिबंधों से राहत देने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण संबंधी प्रावधान शामिल हैं। इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
इसी बीच निवेशकों की नजर अब 17 जून को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है। यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को स्थिर रखता है और भविष्य को लेकर नरम संकेत देता है, तो सोना और चांदी में आगे भी तेजी बनी रह सकती है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अतीत में कई बार शांति वार्ताएं अंतिम चरण में विफल हो चुकी हैं।
कुल मिलाकर, संभावित ईरान-अमेरिका समझौते और फेडरल रिजर्व के फैसले को लेकर बढ़ी उम्मीदों ने सोना और चांदी के बाजार में नई ऊर्जा भर दी है। आने वाले दिनों में दोनों धातुओं की दिशा वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी।