दैनिक खबरनामा ब्यूरो। पेंसिल्वेनिया, 24 जून : अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम एवं शांति समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों पर अनिश्चितकालीन निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जबकि तेहरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
स्विट्जरलैंड में सोमवार को वार्ता के पहले दौर के समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने समझौते के कई अहम पहलुओं पर अलग-अलग बयान दिए। इनमें ईरान को मिलने वाली वित्तीय राहत, होरमुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण तथा लेबनान में जारी संघर्ष जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। पेंसिल्वेनिया में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हम काफी अच्छी तरह से आगे बढ़ रहे हैं।”
युद्ध को लेकर अमेरिका में बढ़ती नाराजगी
इस बीच अमेरिका में युद्ध को लेकर जनता और राजनीतिक वर्ग के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक सर्वेक्षण के अनुसार 35 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि युद्ध के बाद ईरान के मुकाबले अमेरिका की स्थिति पहले से कमजोर हुई है, जबकि केवल 23 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका की स्थिति मजबूत हुई है।
रिपब्लिकन बहुमत वाली अमेरिकी सीनेट ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के रुख के विपरीत जाकर युद्ध समाप्त करने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया। 50-48 मतों से पारित यह प्रस्ताव इस महीने प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव का समर्थन करता है। यह पहली बार है जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने युद्ध शक्तियां अधिनियम के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करने का निर्देश देने वाला प्रस्ताव पारित किया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य में फिर शुरू हुआ यातायात
वाशिंगटन और तेहरान के बीच प्रारंभिक समझौते के बाद होरमुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।
संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने बताया कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने के दौरान फंसे लगभग 11,000 नाविकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
समझौते के अनुसार ईरान अगले 60 दिनों तक जलमार्ग में निर्बाध आवाजाही की अनुमति देगा, हालांकि बाद में शुल्क या अन्य कर लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
ईरान और ओमान ने संयुक्त बयान में जलडमरूमध्य पर अपने “संप्रभु अधिकारों” पर जोर देते हुए यातायात और उससे जुड़ी लागतों के प्रबंधन के लिए सहयोग जारी रखने की बात कही।
परमाणु कार्यक्रम पर आमने-सामने
शांति समझौते के तहत अगले 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत होनी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने क्षतिग्रस्त परमाणु स्थलों तक दीर्घकालिक पहुंच देने पर सहमति जताई है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान ने भविष्य में उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षणों को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।”
लेकिन ईरान ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि वार्ता में उसके परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा ही नहीं हुई और उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को वापस बुलाने की सहमति नहीं दी है।
जमे हुए फंड के उपयोग पर भी विवाद
दोनों देशों के बीच विदेशों में जमे हुए ईरानी धन के उपयोग को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप का कहना है कि यह धन अमेरिका से खाद्य पदार्थ और चिकित्सा सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया जाएगा।
वहीं जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने कहा कि इस धन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा, इसका फैसला केवल ईरान करेगा।
अमेरिका पहले ही 60 दिनों के लिए कुछ प्रतिबंधों में छूट देने पर सहमत हो चुका है, जिससे ईरान तेल और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात कर सकेगा और भुगतान प्राप्त कर सकेगा।
लेबनान बना नई चुनौती
ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इज़राइल के बीच लेबनान में जारी संघर्ष भी समझौते के रास्ते में बाधा बना हुआ है। ईरान का कहना है कि समझौते के तहत इज़राइल को लेबनान से अपनी सेना हटानी होगी, जबकि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने की बात कही है।
इसी बीच मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइली गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इज़राइल पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते ने युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जारी मतभेद इस शांति प्रक्रिया की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।