दैनिक खबरनामा । मंडी, 3 जुलाई: देवदार के सघन वनों से घिरे, कल-कल बहते झरनों की आवाज और मिट्टी के चूल्हे पर बने पारंपरिक भोजन की खुशबू, जाणा गांव को कुल्लू घाटी का एक अनूठा पर्यटन स्थल बनाती है। जाणा वाटरफॉल के नाम से मशहूर यह छोटा सा गांव सेब के बागानों के बीच बसा है और अपनी प्राकृतिक छटा के साथ-साथ स्थानीय खानपान के लिए भी पर्यटकों को खींच लाता है।
कुल्लू शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित जाणा में तीन प्राकृतिक झरने हैं। दो झरने एक-दूसरे के नजदीक हैं, जिनकी ऊंचाई 10 से 15 फीट के बीच है। तीसरा झरना थोड़ी दूरी पर है और लगभग 50 फीट की ऊंचाई से गिरता है। झरनों के पास पर्यटकों के बैठने और भोजन करने की सुविधा भी उपलब्ध है। नग्गर से जाणा की दूरी 12 किलोमीटर है, और गांव से मुख्य झरना केवल 300 मीटर की पैदल दूरी पर है।

यहां की ठंडी पर्वतीय हवा और दूर तक फैली कुल्लू घाटी का नजारा मन को सुकून देता है। सेब के बाग और हरियाली से घिरा यह क्षेत्र फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है। झरने के पानी में समय बिताना पर्यटकों के अनुभव को और यादगार बना देता है।
पर्यटकों के लिए सुविधाएं
पहले दुर्गम माना जाने वाला जाणा अब सड़क मार्ग से पूरी तरह जुड़ चुका है। यह सड़क आगे श्री बिजली महादेव मंदिर तक जाती है। गांव में अब होटल, होम स्टे और सरकारी विश्राम गृह जैसी ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है।

आसपास के दर्शनीय स्थल
जाणा से लगभग 10 किलोमीटर पहले नग्गर में स्थित रोरिक आर्ट गैलरी देखी जा सकती है। यह गैलरी रूसी चित्रकार निकोलस रोरिक को समर्पित है और यहां उनकी कलाकृतियों के साथ उनकी विंटेज कार भी प्रदर्शित है।
इसके अलावा नग्गर में 500 वर्ष पुराना नग्गर कैसल भी है। यह किला कुल्लू के राजा सिद्ध सिंह ने बनवाया था। काष्ठकुणी शैली में बने इस किले में पत्थर और लकड़ी का उपयोग हुआ है, बिना लोहे की कील के। कभी कुल्लू की राजधानी रहा नग्गर का यह किला अब हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम का हेरिटेज होटल है। यहां एक आर्ट गैलरी भी है और छत से पूरी कुल्लू घाटी का विहंगम दृश्य दिखता है। नग्गर से मनाली और हाम्टा पास के लिए भी रास्ता जाता है।
स्थानीय स्वाद
जाणा वाटरफॉल के पास 2-3 पारंपरिक ढाबे हैं। यहां मिट्टी के चूल्हे पर बना खाना परोसा जाता है। पर्यटक लाल चावल, राजमा, कढ़ी, मक्का की रोटी, सरसों का साग, अखरोट का सिड्डू और देसी घी के साथ बिच्छु बूटी की चटनी का लुत्फ उठा सकते हैं। लाल चावल के साथ राजमा और कढ़ी का मेल यहां खास तौर पर पसंद किया जाता है।
कैसे पहुंचें
चंडीगढ़ से जाणा पहुंचने के लिए मनाली-कीरतपुर फोरलेन से कुल्लू आया जा सकता है, जिसकी दूरी लगभग 260 किलोमीटर है। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग से आने वाले यात्री मंडी में मनाली-कीरतपुर फोरलेन से जुड़ सकते हैं। कुल्लू पहुंचकर लेफ्ट बैंक से 23 किलोमीटर दूर नग्गर जाना होगा। नग्गर से जाणा 12 किलोमीटर आगे है। हवाई मार्ग से आने वाले यात्री भुंतर हवाई अड्डे तक उड़ान ले सकते हैं। गांव में रुकने के लिए होटल, होम स्टे और सरकारी विश्राम गृह उपलब्ध हैं।