मध्य प्रदेश 2 जनवरी (दैनिक खबरनामा)दमोह जिले में नए साल की शुरुआत एक मिसाल बन गई, जब कलेक्टर दमोह ने शहरों के बजाय गांव की चौपाल से नववर्ष का आगाज किया। जिला पंचायत सदस्य उपचुनाव के दौरान विकास से कोसों दूर वनांचल ग्राम घोघरा के ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। उस समय कलेक्टर दमोह की समझाइश के बाद ही गांव में मतदान शुरू हो सका था।
चुनाव के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से वादा किया था कि साल के आखिरी दिन से लेकर नए साल के पहले दिन तक वे स्वयं गांव में रहकर उनकी समस्याओं के समाधान की कोशिश करेंगे। अपने इसी वादे को निभाते हुए कलेक्टर दमोह वनांचल ग्राम घोघरा पहुंचे और सभी विभागों के अधिकारियों के साथ गांव में एक विशेष शिविर का आयोजन किया।
कलेक्टर ने रात में ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर चौपाल लगाई और एक-एक कर गांव की समस्याएं सुनीं। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी, राशन, पेंशन और रोजगार से जुड़ी परेशानियों को खुलकर सामने रखा। कलेक्टर ने भी हर समस्या की प्रकृति के अनुसार मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए।शिविर में आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड, पशुपालन, राजस्व, पंचायत, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए, जहां ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया गया। कई लोगों के दस्तावेज मौके पर ही बनाए गए, वहीं कई मामलों में अधिकारियों को समय-सीमा तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।घंटों चली इस चौपाल में गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने वनांचल क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्याओं को कलेक्टर के सामने विस्तार से रखा। कलेक्टर की इस पहल से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा और गांव में सकारात्मक माहौल देखने को मिला।नववर्ष की शुरुआत गांव की चौपाल से कर कलेक्टर दमोह ने यह संदेश दिया कि शासन-प्रशासन की असली प्राथमिकता गांव और वहां रहने वाले लोग हैं, और विकास तभी संभव है जब प्रशासन सीधे जनता से संवाद करे।