दैनिक खबरनामा । नाहन, 17 जून :  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय जल संसाधन योजनाओं में शामिल है। जिला सिरमौर के शिलाई विधानसभा क्षेत्र स्थित मोहराड़-शंभर खेड़ा में बनने वाला यह बांध 236 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा होगा। टिहरी बांध के बाद इसे एशिया के दूसरे सबसे ऊंचे बांधों में गिना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्रदान किया था। बांध के निर्माण से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लगभग 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में भी यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।

32 किलोमीटर लंबी झील का होगा निर्माण

परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के मोहराड़ से लेकर उत्तराखंड के त्यूणी तक करीब 32 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण किया जाएगा। इस विशाल जलाशय के बनने से दोनों राज्यों के कई गांव और बड़ी मात्रा में कृषि एवं वन भूमि जलमग्न हो जाएगी।

900 से अधिक परिवार होंगे प्रभावित

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की जद में लगभग 81,300 पेड़, 631 लकड़ी के मकान और 171 पक्के मकान आएंगे। इसके अलावा 632 संयुक्त परिवार और 508 एकल परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। बांध निर्माण के कारण आठ मंदिर, छह पंचायतें, दो अस्पताल, सात प्राथमिक विद्यालय, दो माध्यमिक विद्यालय और एक इंटर कॉलेज भी प्रभावित होने की आशंका है।

करीब 3 हजार हेक्टेयर भूमि होगी जलमग्न

किशाऊ बांध परियोजना का कुल प्रभावित क्षेत्र 2,950 हेक्टेयर है। इसमें हिमाचल प्रदेश की 1,498 हेक्टेयर और उत्तराखंड की 1,452 हेक्टेयर भूमि जलाशय में समा जाएगी। परियोजना के कारण दोनों राज्यों के लगभग 900 परिवारों के विस्थापित होने का अनुमान है।

सिरमौर, शिमला और उत्तराखंड के 17 गांव होंगे प्रभावित

बांध निर्माण से सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र के मोहराड़, मशवाड़, कंड्यारी, नेरा, बड़ालानी, सियासु, थनाणा और धारवा सहित कई गांव प्रभावित होंगे। इसके अलावा शिमला जिले के गुम्मा, फेलग और अंतरोली तथा उत्तराखंड के क्वानु, सावर और कोटा समेत कुल 17 गांव परियोजना की जद में आएंगे।

किशाऊ बांध एक ओर जहां करोड़ों लोगों की पेयजल और सिंचाई संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक बनेगा, वहीं दूसरी ओर इसके कारण होने वाले विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरणीय प्रभाव भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने हैं। ऐसे में परियोजना के विकासात्मक लाभों के साथ प्रभावित परिवारों के हितों और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

दूसरे राज्य से विवाह कर हिमाचल आने वाली महिलाओं को नहीं मिलेगा आरक्षण, हाईकोर्ट ने खारिज की चारों अपीलें

दैनिक खबरनामा। शिमला, 4 जून 2026:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक…
Share to :

हिमाचल से पंजाब तक कांपी धरती: चंबा केंद्रित 5 तीव्रता के भूकंप से दहशत, कई जिलों में महसूस हुए झटके

दैनिक खबरनामा। कांगड़ा, 5 जून 2026: हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात भूकंप…
Share to :

हिमाचल में आपदा प्रबंधन की मेगा मॉक ड्रिल में उजागर हुईं खामियां, रिस्पॉन्स टाइम और समन्वय पर उठे सवाल

दैनिक खबरनामा। शिमला, 15 जून : हिमाचल प्रदेश में भूकंप, बादल फटने,…
Share to :

आध्यात्मिकता को मिला संगीत जगत का सर्वोच्च सम्मान: दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड, शांति और करुणा के संदेश की वैश्विक स्वीकृति

दैनिक खबरनामा। धर्मशाला, 3 जून: विश्वभर में शांति, करुणा और अहिंसा के…
Share to :