दैनिक खबरनामा । शिमला, 17 जून :  हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं में राज्य की लंबित हिस्सेदारी और ऊर्जा बकाया का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि प्रदेश को देय बकाया राशि 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज सहित दिलाई जाए, जिसकी वर्तमान अनुमानित राशि 7,784 करोड़ रुपये बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की सहमति से 31 अक्तूबर 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया का निपटारा किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि इस बकाया का भुगतान धनराशि के रूप में किया जाता है तो ब्याज सहित इसकी राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचती है।

सुक्खू ने बीबीएमबी परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के लोगों द्वारा झेली गई कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हजारों परिवार विस्थापित हुए, पर्यावरणीय नुकसान हुआ और पौंग बांध से प्रभावित लोगों का पुनर्वास आज तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। ऐसे में राज्य को उसका वैध अधिकार मिलना चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल की मुफ्त बिजली रॉयल्टी बढ़ाने की मांग भी रखी। उन्होंने 180 मेगावाट बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे होने के बाद इसमें हिमाचल की निशुल्क बिजली हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि इस परियोजना का मूल करार समाप्त हो चुका है और केंद्र सरकार को हिमाचल प्रदेश को इसका कब्जा दिलाने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

इसके अलावा सुक्खू ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘हिम चंडीगढ़’ और ‘एयरो सिटी’ परियोजनाओं के विकास के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार कर रही है। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले चरण में केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी हैं, जिन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए।

उन्होंने अमृत योजना के तहत लंबित 64.45 करोड़ रुपये जारी करने तथा ‘अमृत मित्रा योजना’ के अंतर्गत 14 शहरी निकायों में प्रस्तावित 43 परियोजनाओं को मंजूरी देने का भी अनुरोध किया।

गौरतलब है कि पंजाब पुनर्गठन कानून के तहत हिमाचल प्रदेश वर्ष 1977 से बीबीएमबी की भाखड़ा, पौंग और बीएसएल जलविद्युत परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। इस मामले को लेकर राज्य सरकार वर्ष 1998 में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा चुकी है।

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