दैनिक खबरनामा। मुंबई, 13 जुलाई: शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे अब नागपुर में ‘भाजपा मुक्त राम’ के बैनर तले आंदोलन करने की तैयारी में हैं। इस घोषणा के बाद सियासी और धार्मिक दोनों मोर्चों पर विरोध शुरू हो गया है। जिस राम मंदिर को उन्होंने आंदोलन का केंद्र चुना है, उसी मंदिर के पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि मंदिर परिसर पूजा-पाठ के लिए है, राजनीति के लिए नहीं।
अयोध्या के मुद्दे से शुरू हुआ राज्यव्यापी अभियान
शिवसेना यूबीटी अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पूरे महाराष्ट्र में अभियान चला रही है। इस मुहिम की शुरुआत मुंबई के दादर स्थित हनुमान मंदिर से हुई थी, जहां उद्धव ठाकरे ने स्वयं राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया था। उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है और आस्था से खिलवाड़ करने वालों को राम का नाम लेने का अधिकार नहीं है। इस आंदोलन को उन्होंने ‘राम रक्षा आंदोलन’ नाम दिया है और इसे गांव-गांव तक ले जाने की बात कही है।
नागपुर बना अगला पड़ाव
अब इस अभियान का अगला चरण नागपुर के राम नगर स्थित राम मंदिर में आयोजित करने की योजना है। यह जगह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र है। खास बात यह है कि जिस मंदिर में आंदोलन प्रस्तावित है, उसके ट्रस्ट में उद्धव ठाकरे आजीवन सदस्य भी हैं। इसी वजह से उनके इस कदम को फडणवीस को उनके ही शहर में घेरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मंदिर प्रशासन ने लगाई रोक
नागपुर के राम मंदिर के प्रबंधक रवि वाघमारे ने इस प्रस्ताव पर कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है। इसे किसी राजनीतिक दल के प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जा सकता। वाघमारे ने कहा कि मंदिर और देवस्थान का उपयोग केवल आराधना और राम रक्षा स्तोत्र के पाठ के लिए होना चाहिए, न कि शक्ति प्रदर्शन या दल विशेष के विरोध के लिए। उन्होंने सभी दलों से धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
भाजपा का पलटवार
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भी उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला। मुनगंटीवार ने कहा कि शिवसेना यूबीटी की जमीन खिसकने के कारण अब वह राम के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों के साथ सत्ता में रहे, आज वही ‘भाजपा मुक्त राम’ का नारा दे रहे हैं। उनके अनुसार अयोध्या मंदिर के मामले की जांच एजेंसियां कर रही हैं, लेकिन इस मुद्दे को आधार बनाकर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करना केवल एक राजनीतिक हथकंडा है।
फिलहाल मंदिर प्रबंधन के विरोध और भाजपा की आलोचना के बीच उद्धव ठाकरे के नागपुर दौरे को लेकर सियासी तापमान बढ़ गया है।