दैनिक खबरनामा। मुंबई, 13 जुलाई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में एक बार फिर अंतर्कलह सामने आ गई है। पार्टी ने सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया है, लेकिन इसी फैसले के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेता सचिदानंद सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस नियुक्ति को पार्टी के संविधान के विरुद्ध बताते हुए पार्टी नेतृत्व को कानूनी नोटिस भेजा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी में मां-बेटे के नेतृत्व वाली मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
2023 में हुआ था पार्टी का विभाजन
साल 2023 में एनसीपी दो धड़ों में बंट गई थी। इसके बाद अजित पवार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली थी। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी ने सुनेत्रा पवार को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने का ऐलान किया। इसी घोषणा के बाद पार्टी के भीतर असंतोष फूट पड़ा।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
सचिदानंद सिंह की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि नए अध्यक्ष के चयन में पार्टी के नियमों और संविधान की अनदेखी की गई। उनके अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस फैसले पर औपचारिक स्वीकृति नहीं ली गई और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि संगठनात्मक मानदंडों का पालन नहीं हुआ।

तुरंत नियुक्ति रद्द करने की मांग
लीगल नोटिस में सचिदानंद सिंह ने मांग की है कि सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और पार्टी संविधान के अनुसार नए सिरे से चयन प्रक्रिया अपनाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मांग नहीं मानी गई तो वे अदालत का रुख करेंगे।
अभी तक एनसीपी नेतृत्व की तरफ से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन इस कदम से पार्टी के अंदर चल रही नाराजगी और गुटबाजी एक बार फिर उजागर हो गई है। अब देखना होगा कि पार्टी आलाकमान इस विवाद को कैसे सुलझाता है और आगे क्या निर्णय लेता है।