दैनिक खबरनामा ब्यूरो। वॉशिंगटन, 14 जुलाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगाए जाने वाले 20 फीसदी शुल्क के फैसले को एक दिन के भीतर ही वापस ले लिया है। मंगलवार को उन्होंने ‘टूथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि मध्य पूर्व के नेताओं से हुई अहम बातचीत के बाद उन्होंने इस वसूली शुल्क को हटाकर उसकी जगह व्यापार और निवेश समझौतों को तरजीह देने का निर्णय किया है।
ट्रंप ने लिखा कि खाड़ी के कई देश अब अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश करेंगे। उनके मुताबिक ये समझौते न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरे मध्य-पूर्व के भविष्य के लिए लाभकारी साबित होंगे।
हमले और जवाबी कार्रवाई तेज
पृष्ठभूमि में होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर बढ़ गया है। आरोप है कि ईरान ने यूएई के दो कार्गो जहाजों को निशाना बनाया, जिसके बाद अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के करीब एक दर्जन ठिकानों पर हवाई हमले किए। दोनों देशों के बीच इस नए टकराव से पिछले महीने हुआ युद्धविराम समझौता भी खतरे में पड़ गया है।
एपी के अनुसार ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अब जहाजों की सुरक्षा के बदले शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसकी भरपाई खाड़ी देशों के साथ होने वाले निवेश और व्यापार सौदों से की जाएगी। इस प्रस्ताव की संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत कई देशों ने आलोचना की थी। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने तंज कसते हुए कहा था कि ट्रंप अमेरिका को “डकैती” की राह पर ले जा रहे हैं।
पांच घंटे तक बमबारी का दावा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मंगलवार को ईरान पर करीब पांच घंटे तक लगातार बम गिराए गए। कमांड का कहना है कि हमले ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाकर किए गए। सेंटकाम ने चेतावनी दी कि ये कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि ईरान को नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हमलों की भारी कीमत चुकानी पड़े।
हमलों के तुरंत बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला किया गया है और क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू की जा रही है। सेंटकाम ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को ‘नोटिस टू मैरिनर्स’ पर नजर रखने और अमेरिकी नौसेना से ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16 पर संपर्क करने की सलाह दी है।
ईरानी मीडिया के अनुसार कई शहरों में हमले हुए जिनमें चार लोग घायल हुए। सेंटकाम ने एक्स पर बताया कि बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, कोनारक, आबादान, किश, क़ेशम और अबू मूसा द्वीपों पर भारी बमबारी हुई। इसके अलावा बुशहर के जाम और जोगडक में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। दक्षिण-पश्चिम ईरान के खुजेस्तान प्रांत में भी मिसाइलें गिरीं।
ईरान का पलटवार
एपी की खबर के अनुसार ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी ने दावा किया कि जवाब में “ऑपरेशन नत्र 2” चलाया गया। इसके तहत जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसे जॉर्डन ने चार में से सभी हमलों को नाकाम करने का दावा किया। बहरीन में तीन बार सायरन बजे और वहां स्थित अमेरिकी अड्डों पर भी हमला हुआ। कुवैत में अमेरिकी क्रूज मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही होर्मुज के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया गया।
कांग्रेस को दी जानकारी
एएनआई के मुताबिक ट्रंप ने 10 जुलाई को सीनेट के कार्यवाहक अध्यक्ष चक ग्रासले को पत्र भेजकर बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान सात जुलाई से फिर शुरू हो गया है। यह कदम अमेरिका-ईरान के बीच महीनों से चले युद्धविराम के टूटने के बाद उठाया गया।
पिछली बार कांग्रेस को सूचित न करने को लेकर ट्रंप की आलोचना हुई थी। इस बार 1973 के वार पावर्स रिजोल्यूशन के तहत हमले के 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को सूचना दी गई।
पत्र में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान से कूटनीतिक हल निकालने की कोशिश की थी और पिछले महीने एक समझौता भी हुआ था। लेकिन ईरान द्वारा तीन तेल टैंकरों पर हमला करने से वह समझौता टूट गया, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी। ट्रंप ने दावा किया कि इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई 90 फीसदी तक प्रभावित हुए हैं और अमेरिका ने ईरान का “सबकुछ तबाह” कर दिया है।