बूंदी 2 जनवरी (दैनिक खबरनामा)जिले की करवर उपतहसील के अरनेठा गांव में भू-माफिया और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत का मामला लगातार सामने आ रहा है। आरोप है कि आबादी क्षेत्र से जुड़े आम रास्तों और राजस्व की बेशकीमती जमीनों पर खुलेआम अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालते नजर आ रहे हैं।गांव के स्वर्गीय गोपीनाथ के वारिसान पर आरोप है कि उन्होंने मुख्य बाजार से जुड़ी राजस्व की कीमती भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया है। यह जमीन न केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, बल्कि वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन के लिए आम रास्ते के रूप में उपयोग में लाई जा रही है। अवैध कब्जों के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले की शिकायत मिलने पर पटवारी परमानंद गुर्जर ने मौके पर पहुंचकर मौका रिपोर्ट (91 की रिपोर्ट) तैयार की और आगे की कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार को राजस्व टीम गठित कर आम रास्ते का सीमा ज्ञान कराने का प्रस्ताव भेजा। हालांकि, आरोप है कि 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नायब तहसीलदार द्वारा सीमा ज्ञान के आदेश जारी नहीं किए गए।इतना ही नहीं, अब पटवारी से वही 91 की रिपोर्ट वापस मांगे जाने की बात सामने आ रही है, जिससे पूरे मामले को दबाने और अवैध कब्जाधारियों को राहत देने के आरोप और गहरे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सीमा ज्ञान कराया जाता, तो अवैध निर्माण और कब्जों पर तुरंत रोक लगाई जा सकती थी।गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी करवर उपतहसील के जिम्मेदार अधिकारियों पर केंद्रीय नहर परियोजना में अवाप्त भूमि से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। इसके बावजूद न तो ठोस जांच हुई और न ही प्रभावी कार्रवाई, जिससे भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल सीमा ज्ञान कराया जाए, अवैध कब्जे हटाए जाएं और दोषी अधिकारियों व भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक रास्तों और राजस्व भूमि की रक्षा हो सके।