दैनिक खबरनामा। शिमला, 28 जुलाई: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, विस्तार और पार्किंग प्रबंधों को लेकर राज्य सरकार की धीमी कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सरकार को साफ चेताया कि अगर पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह टिप्पणी एक जनहित याचिका और उससे जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान की गई।
सरकार ने कोर्ट में रखी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान ऊना के डिप्टी कमिश्नर ने हलफनामा पेश किया। रिपोर्ट में कहा गया कि मंदिर के आसपास उपलब्ध पार्किंग स्थलों की सूची बना ली गई है। साथ ही मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर दूर भारी वाहनों के लिए पार्किंग हेतु सरकारी जमीन चिन्हित कर ली गई है। उस जमीन को माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर ट्रस्ट के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ट्रांसफर के बाद निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा।
प्रशासन ने अदालत को बताया कि मंदिर ट्रस्ट से सटी जमीन को अधिग्रहित करने की कार्रवाई चल रही है। इसके लिए स्थानीय दुकानदारों से बातचीत जारी है। इस जमीन पर श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, पीने के पानी, शौचालय और नई पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ता रजनीश खोसला ने प्रशासन के दावों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महीनों बीत जाने के बावजूद जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा, सब कुछ सिर्फ कागजों तक सीमित है। मामले से जुड़े अन्य पक्षों ने भी डीसी ऊना की स्टेटस रिपोर्ट पर ऐतराज किया और सरकार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि 30 दिसंबर 2024 को जारी आदेशों का तय समय में क्रियान्वयन नहीं हुआ। हलफनामे में भूमि अधिग्रहण की मौजूदा स्थिति भी स्पष्ट नहीं बताई गई। अदालत ने सरकारी पक्ष को चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो जिम्मेदार अधिकारियों को कठोर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
मामले की अगली सुनवाई *21 अगस्त 2026* को होगी।