दैनिक खबरनामा | 6 अगस्त 2026 | अयोध्या
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पारदर्शिता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित बहुमूल्य आभूषणों का डिजिटल दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के लॉकर में सुरक्षित रखे गए आभूषणों की विस्तृत वीडियोग्राफी कराई गई है।
चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बाद नकदी के साथ-साथ कीमती आभूषणों के गायब होने के आरोप भी सामने आए थे। हालांकि ट्रस्ट पहले ही इन सभी दावों को निराधार बताते हुए खारिज कर चुका है। अब भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या भ्रम की स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक बहुमूल्य आभूषण का वीडियो रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
यह पूरी प्रक्रिया पिछले चार दिनों तक चली। इस दौरान ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, हस्ताक्षरी जगदीश आफले, लेखाकार चंदन राय तथा भारतीय स्टेट बैंक के स्थानीय और क्षेत्रीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की निगरानी में सोने-चांदी के आभूषणों सहित अन्य मूल्यवान उपहारों की अलग-अलग वीडियोग्राफी की गई। साथ ही अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन ने बैंक खातों की भी समीक्षा की।
ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लॉकर में सुरक्षित रखे गए इन बहुमूल्य आभूषणों को भविष्य में ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक आभूषण का अलग-अलग वीडियो तैयार किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इसे प्रमाण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सके।
ट्रस्ट का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में यदि किसी प्रकार का विवाद या भ्रम उत्पन्न होता है तो तथ्यात्मक साक्ष्य उपलब्ध रहेंगे। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद श्रद्धालु ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाकर चढ़ावे में प्राप्त बहुमूल्य आभूषणों को देख सकेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और श्रद्धालुओं का विश्वास सुदृढ़ करना है।
ट्रस्ट के एक सदस्य के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर आगामी बैठक में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक में वेबसाइट पर आभूषणों को प्रदर्शित करने की रूपरेखा और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राम कचहरी के महंत शशिकांत दास ने ट्रस्ट की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड और सार्वजनिक प्रदर्शन की व्यवस्था भविष्य में उठने वाले अनावश्यक सवालों का प्रभावी उत्तर साबित होगी और इससे श्रद्धालुओं का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।