दैनिक खबरनामा | 6 अगस्त | नई दिल्ली : देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को ‘गोबरधन’ (नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम) को मंजूरी दे दी। इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल 23,731 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
यह योजना वित्त वर्ष 2027 से वित्त वर्ष 2036 तक लागू रहेगी। सरकार का लक्ष्य संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन में करीब 10 गुना वृद्धि करना, इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करना और देश में सर्कुलर जैव अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
सरकार ने योजना के तहत सीबीजी उत्पादकों के लिए स्थायी बाजार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सीबीजी ऑफटेक एश्योरेंस’व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियां सीबीजी की खरीद करेंगी, जिससे वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से आगे सीएनजी (परिवहन) तथा पीएनजी (घरेलू) श्रेणियों में 5 प्रतिशत सीबीजी मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के अनुसार, इस व्यवस्था से उद्योग को दीर्घकालिक मांग का स्पष्ट संकेत मिलेगा। सीजीडी नेटवर्क के माध्यम से नियमित खरीद होने से परियोजनाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, संयंत्रों की क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा और निजी निवेश को भी गति मिलेगी।
योजना के तहत सरकार ने सीबीजी की प्रशासनिक कीमत 2,110 रुपए प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तय की है। यह मूल्य निर्धारण व्यवस्था कम से कम 10 वर्ष तक प्रभावी रहेगी, जिससे उत्पादकों को स्थिर आय का भरोसा मिलेगा और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें भी संतुलित बनी रहेंगी। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों को आकर्षक प्रतिफल मिलेगा और नई परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके अलावा, पात्र ग्रीनफील्ड सीबीजी परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन (टीपीडी) 2 करोड़ रुपए तक की पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता केवल संयंत्र और मशीनरी तक सीमित नहीं होगी, बल्कि फीडस्टॉक संग्रहण, जैविक खाद प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़ी परिसंपत्तियों को भी कवर करेगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी इस सहायता का लाभ मिलेगा।
योजना में सीबीजी संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से जोड़ने के लिए क्लस्टर आधारित और स्वतंत्र पाइपलाइन अवसंरचना को भी समर्थन दिया जाएगा। इससे परिवहन लागत घटेगी, गैस की आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनेगी, बाजार का विस्तार होगा और घरेलू स्तर पर उत्पादित सीबीजी के उपयोग में बढ़ोतरी होगी।
एमएसएमई आधारित पात्र सीबीजी परियोजनाओं के लिए एक विशेष क्रेडिट गारंटी तंत्र भी स्थापित किया जाएगा। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों का भरोसा बढ़ेगा, ऋण उपलब्ध कराना आसान होगा, जमानत की आवश्यकता कम होगी और परियोजनाओं को तेजी से विकसित करने में मदद मिलेगी।
जिला स्तर पर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर सीबीजी मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए ‘सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड’ भी बनाया जाएगा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना सीबीजी क्षेत्र की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगी।