दैनिक खबरनामा | 7 अगस्त | न्यू मैक्सिको: सोशल मीडिया कंपनी Meta की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक अदालत ने बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर कथित प्रतिकूल प्रभाव डालने के मामले में कंपनी पर 567 मिलियन डॉलर यानी करीब 5,390 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने Facebook और Instagram के डिजाइन तथा नीतियों को लेकर कंपनी पर गंभीर टिप्पणियां कीं।
अदालत के अनुसार, Meta के प्लेटफॉर्म युवाओं में अत्यधिक इस्तेमाल और लत की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले तरीके से डिजाइन किए गए थे। फैसले के बाद कंपनी को नाबालिग यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े कई उपाय लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
युवाओं की सोशल मीडिया लत पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यू मैक्सिको के सांता फे में हुई सुनवाई के दौरान जज ब्रायन बीडशाइड ने डेमोक्रेट अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि Meta ने अपने प्लेटफॉर्म इस तरह विकसित किए कि युवा यूजर्स उनके अत्यधिक इस्तेमाल की ओर आकर्षित हों।
मामले में कंपनी पर बच्चों को यौन शोषण जैसी गंभीर घटनाओं से सुरक्षित रखने में नाकाम रहने के आरोप भी लगाए गए। अदालत ने इन परिस्थितियों को ‘पब्लिक न्यूसेंस’ यानी सार्वजनिक परेशानी की स्थिति से जोड़ते हुए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया।
उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन का आरोप
यह फैसला उस कार्रवाई के करीब पांच महीने बाद आया है, जिसमें न्यू मैक्सिको की जूरी ने Meta को 375 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश दिया था।
जूरी की जांच में सामने आया था कि कंपनी ने Facebook और Instagram पर युवा यूजर्स की सुरक्षा को लेकर कथित तौर पर भ्रामक दावे किए और गलत जानकारी दी। इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन के तौर पर देखा गया।
पांच साल तक लागू रहेंगे नए सुरक्षा नियम
अमेरिका में Meta समेत सोशल मीडिया कंपनियों पर युवाओं की सुरक्षा को लेकर कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहा है। 40 से ज्यादा राज्यों और 1,300 से अधिक स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से भी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ ‘पब्लिक न्यूसेंस’ से जुड़े मामले दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
जज बीडशाइड के आदेश के तहत Meta को किशोरों के Facebook और Instagram इस्तेमाल पर मासिक नियंत्रण जैसे उपाय लागू करने होंगे। इसके अलावा नोटिफिकेशन को सीमित करने और नाबालिगों के साथ वयस्कों के संपर्क की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनी को AI चैटबॉट्स से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों को मजबूत करने और यौन शोषण की रिपोर्टिंग व्यवस्था में भी सुधार करना होगा। ये न्यायिक निर्देश अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहने की बात कही गई है।
Meta बोली-फैसले के खिलाफ करेगी अपील
फैसले के बाद Meta ने अपने बचाव में कहा है कि कंपनी युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठा रही है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि Meta को किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा के अपने रिकॉर्ड पर भरोसा है और वह अदालत के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी।
वहीं, अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने फैसले का स्वागत करते हुए Meta पर बच्चों की सुरक्षा की तुलना में मुनाफे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फैसला दूसरे राज्यों और देशों के लिए सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक ‘रोडमैप’ बनेगा।
पिछले साल Reuters की एक रिपोर्ट में भी Meta के AI चैटबॉट्स को लेकर बच्चों के साथ अनुचित बातचीत की संभावनाओं का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद कंपनी की युवा-सुरक्षा नीतियों पर भी सवाल उठे थे।