नई दिल्ली, 16 अगस्त: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष एवं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर 13 अगस्त को नांदेड़ साहिब में हुए हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की गई है। बठिंडा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर 13 अगस्त 2026 की घटना के साथ-साथ 4 दिसंबर 2024 को हुए पहले हमले की भी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है।
हरसिमरत कौर बादल ने सुखबीर सिंह बादल के घायल हाथ की पहली तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने बताया कि हमले में उनके बाजू पर 150 से अधिक टांके लगे हैं। उनके मुताबिक, नांदेड़ साहिब में गुरु घर में मत्था टेकने के बाद बाहर निकलते समय एक व्यक्ति ने तलवार से सुखबीर बादल पर हमला किया। उनका आरोप है कि हमलावर का इरादा उनकी जान लेने का था। हमले में सुखबीर बादल के दाहिने हाथ पर गंभीर चोट आई, जबकि उन्हें बचाने का प्रयास करने वाला एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हुआ।
हरसिमरत कौर ने कहा कि 13 अगस्त की घटना को अकेली घटना मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब परिसर में हुए हमले का भी उल्लेख किया। उस समय सुखबीर सिंह बादल श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देश पर सेवा कर रहे थे। सांसद ने दोनों घटनाओं में कथित समानताओं का हवाला देते हुए आशंका जताई कि इनके बीच कोई संबंध हो सकता है।
उन्होंने बताया कि 2024 में हमलावर ने करीब डेढ़ फीट लंबी किरच से सुखबीर बादल की छाती पर वार किया था। हालांकि, हाथ आगे आ जाने के कारण किरच उनके हाथ को आर-पार करती हुई निकल गई। हरसिमरत कौर के अनुसार, इसी वजह से उन्होंने दोनों मामलों की जांच NIA को सौंपने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने दोनों घटनाओं के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका भी जताई।
अपने पत्र में हरसिमरत कौर ने पंजाब पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 2024 के हमले के आरोपी के उग्रवादी संबंधों और सुखबीर बादल को पहले से मिल रही धमकियों की जानकारी होने के बावजूद उसे श्री हरमंदिर साहिब परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने और सुखबीर बादल तक पहुंचने का अवसर मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमले से पहले कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आरोपी के बीच कथित करीबी संबंधों को दिखाने वाली तस्वीरें और अन्य घटनाक्रम सामने आए थे। इससे पुलिस की संभावित लापरवाही या मिलीभगत को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई।
हरसिमरत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि 2024 की घटना के बाद पुलिस ने मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, हमले के तत्काल बाद कुछ पुलिस अधिकारियों की ओर से ऐसे बयान सामने आए, जिनमें हमलावर के बजाय पीड़ित पर ही सवाल उठाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के बयान शुरुआती चरण में दर्ज नहीं किए गए, जिससे जांच की प्रक्रिया पर संदेह पैदा हुआ।
सांसद ने गृह मंत्री को लिखे पत्र में धार्मिक और राजनीतिक आधार पर हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गुरु घर जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों पर बार-बार हिंसक घटनाएं होना गंभीर विषय है। इससे सिख समुदाय की भावनाएं प्रभावित होने के साथ-साथ पंजाब और देश की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
हरसिमरत कौर ने पंजाब की भौगोलिक एवं सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सीमावर्ती राज्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में यदि किसी उग्रवादी, अंतरराज्यीय या विदेशी नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है, तो उसकी विस्तृत जांच जरूरी है। उनका कहना है कि इन घटनाओं को महज कानून-व्यवस्था का विषय मानकर समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया कि 13 अगस्त 2026 और 4 दिसंबर 2024 को हुए दोनों हमलों की जांच NIA को सौंपी जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं दोनों घटनाएं किसी व्यापक साजिश का हिस्सा तो नहीं थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच के दौरान किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान अथवा गलत तरीके से आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए और वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्र के अंत में हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब और देश 1980 और 1990 के दशक जैसे हिंसक दौर की वापसी का जोखिम नहीं उठा सकते। उन्होंने राजनीतिक या धार्मिक रूप से प्रेरित हिंसा और हत्या के प्रयासों के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।