दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 17 अगस्त 2026. पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के इलाज को लोगों के लिए आर्थिक रूप से सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के 11 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 7 महीनों में योजना के तहत 709 लाभार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज करवाया, जिस पर ₹83.36 लाख का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाया गया।
आंकड़ों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य का इलाज करवाने वाले लाभार्थियों में 18-45 आयु वर्ग की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। 31-45 आयु वर्ग के 284 लाभार्थियों और 18-30 आयु वर्ग के 249 लाभार्थियों ने योजना के तहत कैशलेस इलाज प्राप्त किया। दोनों आयु वर्गों को मिलाकर 533 लाभार्थी बनते हैं, जो कुल लाभार्थियों का 75.2% हैं। यह आंकड़ा कामकाजी आयु वर्ग के लोगों के लिए समय पर और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष आवश्यकता को रेखांकित करता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी सुविधा नहीं होनी चाहिए, जिसका लाभ केवल आर्थिक रूप से सक्षम परिवार ही उठा सकें। यदि किसी व्यक्ति को पेशेवर सहायता की आवश्यकता है तो उसे सही समय पर सही इलाज उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत न्यूरोटिक एवं तनाव संबंधी विकारों, मूड एवं भावनात्मक विकारों, मानसिक एवं शारीरिक कारकों से संबंधित व्यवहार संबंधी सिंड्रोम तथा नशीले पदार्थों के उपयोग के कारण होने वाले मानसिक एवं व्यवहार संबंधी विकारों सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज किया जा रहा है। इससे यह भी सामने आता है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और नशे के उपयोग से जुड़ी दिक्कतों के लिए समय पर इलाज उपलब्ध करवाना कितना महत्वपूर्ण है।
सिविल अस्पताल बरनाला की कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. गगनदीप सेखों ने कहा कि 18-45 आयु वर्ग मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह वह समय होता है जब लोग करियर बनाने, परिवार संभालने, रिश्तों को निभाने और महत्वपूर्ण आर्थिक जिम्मेदारियां पूरी करने में व्यस्त होते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को अक्सर तब तक नजरअंदाज किया जाता है, जब तक वे व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू नहीं कर देतीं। ऐसे में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य और नशे के उपयोग के बीच मजबूत संबंध को भी सामने लाते हैं। नशीले पदार्थों के उपयोग से जुड़े मानसिक एवं व्यवहार संबंधी विकारों के इलाज की जरूरत यह दर्शाती है कि नशा मुक्ति, पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना जरूरी है। इसी दिशा में पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम रोकथाम, नशा मुक्ति सेवाओं और पुनर्वास को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार प्रदेश के हर परिवार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख का कैशलेस स्वास्थ्य कवर उपलब्ध करवाया जा रहा है और इसमें मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित उपचार को भी शामिल किया गया है। इससे इलाज की लागत को लेकर लोगों की आर्थिक झिझक कम करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ मुहिम रोकथाम, नशा मुक्ति और पुनर्वास को मजबूत कर रही है, जबकि ‘सीएम दी योगशाला’ स्वस्थ जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। ये तीनों पहलें मिलकर रोकथाम, स्वस्थ जीवनशैली, नशा मुक्ति, पुनर्वास और पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य उपचार को एक व्यापक व्यवस्था के रूप में मजबूत कर रही हैं।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के आंकड़ों में 4 में से 3 से अधिक लाभार्थियों का 18-45 आयु वर्ग से संबंधित होना यह स्पष्ट करता है कि कामकाजी उम्र की आबादी के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाकर उनके स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और समग्र तंदुरुस्ती की रक्षा करना है।