दैनिक खबरनामा | अमृतसर, 17 अगस्त 2026. गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने और विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के 30 विद्यार्थियों ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के साथ शैक्षणिक सहयोग के तहत आयोजित ऑनलाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। विश्वविद्यालय में आयोजित ‘विकसित अमृतसर एआई नेतृत्व कार्यक्रम’ के दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो. डॉ. करमजीत सिंह ने विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड और विकसित अमृतसर के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक विशेषज्ञता, उभरती प्रौद्योगिकियों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव का लाभ अमृतसर में रहते हुए ही प्राप्त हुआ। ‘प्रतिभा हर जगह है, अवसर भी हर जगह होना चाहिए’ विषय के तहत आयोजित इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भौगोलिक या आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने से वंचित न करें।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने ‘वैश्विक शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण’ विषय पर कहा कि विश्वविद्यालयों को अपनी स्थानीय जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर से भी जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीयकरण केवल संस्थागत समझौतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक कक्षागत एवं सीखने के अनुभवों के माध्यम से इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलना चाहिए।
प्रो. करमजीत सिंह ने शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग, शासन और समाज पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का रचनात्मक, जिम्मेदार और नैतिक तरीके से उपयोग करने के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है।
समारोह में मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने अमेरिका-भारत शैक्षणिक साझेदारी पर अपना संदेश दिया, जबकि दिल्ली के उपराज्यपाल स. तरनजीत सिंह ने भारत के विकास और युवा आबादी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व पर विचार साझा किए।
मैरीलैंड राज्य के उच्च शिक्षा सचिव संजय राय तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वरिष्ठ प्रतिनिधियों अमिताभ वर्षने और एमी चेस्टर ने भी विद्यार्थियों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित कौशल और क्षमताओं के विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. संदीप शर्मा ने विश्वविद्यालय के कंप्यूटर इंजीनियरिंग विद्यार्थियों की प्रतिभा और क्षमता की सराहना की। अकादमिक मामलों के डीन प्रो. एच.एस. सैनी ने कार्यक्रम पूरा करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। इस अवसर पर आयोजित विद्यार्थी अनुभव सत्र में प्रतिभागियों ने अपने सीखने के अनुभव, भविष्य की आकांक्षाओं तथा अमृतसर, पंजाब और भारत के विकास में योगदान देने से संबंधित विचार साझा किए।
कार्यक्रम के माध्यम से उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को भी मजबूत किया गया। आईबीएम इंडिया के मणि मधुकर ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और आईबीएम के बीच शैक्षणिक सहयोग पर विचार रखे। पंजाब एआई एक्सीलेंस के समन्वयक डॉ. संदीप सिंह संधा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के केवल उपकरणों के उपयोग से आगे बढ़कर स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
30 विद्यार्थियों के पहले समूह द्वारा कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करना वैश्विक शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार, उद्योग सहयोग और विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों का दीर्घकालिक मंच स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है। यह पहल गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक विशेषज्ञता से जोड़ते हुए पंजाब और भारत की विकास आवश्यकताओं में योगदान देने के लिए विद्यार्थियों को तैयार किया जा रहा है।