दैनिक खबरनामा | 18 अगस्त | मेरठ: स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। यूपी एटीएस (UP ATS) ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट कर मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को रेखांकित किया और सुरक्षा एजेंसियों के ऑपरेशन की जानकारी साझा की।
14 राज्यों में अभियान, 200 से अधिक ऑपरेटिव्स गिरफ्तार
अमित शाह के अनुसार, मोदी सरकार ने आईएसआई के सहयोगी पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई करते हुए 200 से अधिक स्लीपर सेल और ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई से देश में संभावित आतंकी हमलों की साजिश को विफल करने में सफलता मिली।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहजाद भट्टी और सरफराज डोगरा के गिरोह से जुड़े 16 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। जांच में इन आरोपियों के तार मेरठ और आसपास के जिलों से जुड़े पाए गए हैं।
हापुड़ से सहारनपुर तक नेटवर्क की जांच
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकी नेटवर्क को लेकर जांच और तेज हो गई है। पिछले सात महीनों में एटीएस और सिविल पुलिस ने हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से कुल 16 संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा है।
जांच के दौरान उमर, आजाद राजपूत और तुषार चौहान जैसे स्थानीय युवकों के भी इस नेटवर्क के संपर्क में आने की बात सामने आई है। आरोप है कि ये युवक आतंकी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। तुषार चौहान द्वारा धर्म बदलकर मुस्लिम नाम अपनाने की बात भी जांच में सामने आई है। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जफर की गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय हैं।
मदरसे से जुड़ा कनेक्शन, जैश के लिए चंदा जुटाने का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोहम्मद जफर का संबंध बुलंदशहर के एक मदरसे से रहा है। बताया गया है कि इसी मदरसे के एक परिचित ने 2017 में उसे पढ़ाई के लिए मेरठ बुलाया था।
एटीएस ने जफर को दो दिन पहले हापुड़ के शेरपुर स्थित एक मस्जिद से पकड़ा था। पूछताछ के बाद उसे उस समय छोड़ दिया गया, लेकिन उसके उर्दू दस्तावेज जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लिए। इन दस्तावेजों का उर्दू अनुवादक से परीक्षण कराया गया तो कथित तौर पर जफर की गतिविधियों से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई।
जांच में आरोप है कि जफर जैश-ए-मोहम्मद के लिए चंदा जुटाकर संगठन तक पहुंचाता था। इसके बाद एटीएस ने उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया।
पाकिस्तान जाने की तैयारी, मसूद अजहर से मुलाकात का दावा
बिहार के मूल निवासी मोहम्मद जफर के बारे में जांच में यह भी सामने आया है कि वह आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर से प्रभावित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसने बिहार के पते पर पासपोर्ट बनवा लिया था और पाकिस्तान जाने की तैयारी में था।
जांच एजेंसियों का दावा है कि जफर ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर से मुलाकात की योजना भी तय कर ली थी। एजेंसियों को आशंका है कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी बड़े धमाके की साजिश में शामिल हो सकता था।
फिलहाल यूपी एटीएस जफर से जुड़े नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे। लखनऊ से जेल भेजे जाने के बाद उसके पासपोर्ट को रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।