दैनिक खबरनामा | 29 अक्टूबर | मुंबई। म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक नवंबर से नया बदलाव लागू होगा। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर म्यूचुअल फंड स्कीमों में डायरेक्ट प्लान डिफॉल्ट विकल्प होंगे। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बताया कि रेगुलर प्लान चुनने वाले ग्राहकों को अधिक एक्सपेंस रेश्यो की जानकारी भी देनी होगी। डायरेक्ट प्लान में आमतौर पर खर्च कम होने के कारण निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
आईपीओ के नियमों की भी होगी समीक्षा
मुंबई में एनडीटीवी प्रॉफिट इग्नाइट के दीपावली संस्करण में पांडे ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) मेनबोर्ड आईपीओ, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ), एसएमई आईपीओ और इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म के नियमों की समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य खासकर नई पीढ़ी की कंपनियों को सार्वजनिक पूंजी जुटाने के बेहतर अवसर देना है।
पांडे के अनुसार, सेबी आईपीओ से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी में है। इसके तहत थर्ड-पार्टी एजेंसियां जांच करेंगी कि कंपनियां ऑफर दस्तावेजों में बताए गए उद्देश्यों के अनुसार ही धन खर्च कर रही हैं या नहीं। डिबेंचर ट्रस्टियों से जुड़े नियमों की भी समीक्षा की जा रही है।
नियम तोड़ने पर जुर्माना और डीमैट खाते फ्रीज करने का प्रस्ताव
सेबी ने इसी महीने आईपीओ की रकम की निगरानी बढ़ाने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। प्रस्ताव के मुताबिक, ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) को छोड़कर सभी सार्वजनिक निर्गमों में निगरानी एजेंसी नियुक्त करना अनिवार्य हो सकता है, चाहे इश्यू का आकार कितना भी हो।
यदि कोई कंपनी निगरानी एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करती, तो स्टॉक एक्सचेंज प्रत्येक मामले में 50,000 रुपये का जुर्माना लगा सकेंगे। लगातार नियमों का पालन नहीं करने पर डिपॉजिटरी प्रमोटरों के डीमैट खाते फ्रीज कर सकती हैं। ऐसी कंपनियां अपनी मौजूदा निगरानी एजेंसी से समझौता समाप्त नहीं कर सकेंगी और न ही दूसरी एजेंसी नियुक्त कर सकेंगी, जब तक वे उल्लंघन को ठीक नहीं कर लेतीं।
ये प्रस्ताव अभी परामर्श प्रक्रिया में हैं और लागू नियम नहीं बने हैं। फिलहाल, 100 करोड़ रुपये से अधिक के फ्रेश इश्यू से जुटाई गई रकम की निगरानी सेबी में पंजीकृत क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।