किलाड़ (चंबा)पांगी घाटी के लोगों के लिए शनिवार का दिन नई उम्मीदों की सौगात लेकर आया। शिमला से सीमा सड़क संगठन (BRO) के चीफ इंजीनियर राजीव कुमार के किलाड़ पहुंचते ही क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने पारंपरिक पंगवाली टोपी और शॉल पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष भानी चंद ठाकुर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने चीफ इंजीनियर से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याएं उनके सामने रखीं। लोगों ने ग्रीफ कैंप से लेकर महालू नाला तक सड़क को जल्द पक्का करने की मांग की, ताकि धूल, गड्ढों और खराब रास्तों से निजात मिल सके।पुर्थी–किलाड़ सड़क पर युद्धस्तर पर होगा कामअधिकारियों के साथ हुई बैठक में पांगी वासियों को बड़ी राहत मिली। चीफ इंजीनियर राजीव कुमार ने आश्वासन दिया कि पुर्थी से किलाड़ तक तारकोल बिछाने का काम अब युद्धस्तर पर किया जाएगा। पुर्थी से रेंई तक कार्य शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में पुर्थी से किलाड़ के बीच कई हिस्सों में एक साथ मशीनें काम करती नजर आएंगी। पूरे मार्ग को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी 108 आरसीसी कंपनी को सौंपी गई है।इस अवसर पर आवासीय आयुक्त पांगी अमनदीप, बीडीओ योगेश और वन मंडल अधिकारी रवि गुलेरिया भी मौजूद रहे।समाजसेवी ने बताया घाटी का पुराना दर्दसमाजसेवी शिव नाथ शर्मा ने पांगी घाटी की वर्षों पुरानी पीड़ा को सामने रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1978 में उदयपुर से संसारी नाला तक सड़क निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन 46 साल बीतने के बाद भी करीब 100 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरी तरह पक्का नहीं हो सका है। आज भी मणग्रां से तिंदी और पुर्थी से किलाड़ तक का रास्ता संकरा और कच्चा है, जिससे यात्रा करना जोखिम भरा बना हुआ है। लोगों ने इन सड़कों को जल्द डबल लेन करने की मांग की, ताकि पांगी का विकास सही मायनों में हो सके।बीआरओ के कार्यों की खुलकर सराहना स्थानीय लोगों ने अपनी समस्याएं रखने के साथ-साथ बीआरओ के कार्यों की जमकर सराहना भी की। दीपक प्रोजेक्ट के तहत किए गए कार्यों के लिए लोगों ने चीफ इंजीनियर का आभार जताया। उन्होंने बताया कि आपदा के समय जब सिद्ध मंदिर नाला, महालू नाला और धरवास पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे, तब सीमा सड़क संगठन ने दिन-रात मेहनत कर महज 15 दिनों में सड़क को बहाल कर दिया था।
अब पांगी घाटी के लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से अधूरा पड़ा पक्की सड़क का सपना जल्द ही साकार होगा।