चंडीगढ़ चंडीगढ़ 12 जनवरी( जगदीश कुमार) चंडीगढ़।गंभीर सांस संबंधी बीमारियों के इलाज में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई), चंडीगढ़ ने मोहाली स्थित क्लेरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं।इस समझौते के तहत स्वदेशी रूप सेविकसित ‘ट्रूऑक्सी+ हाई फ्लो नेजल कैनुला (HFNC) सिस्टम’ को देशभर में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा।यह परियोजना कोरोना महामारी के दौरान शुरू की गई थी, जब देश में ऑक्सीजन और एडवांस्ड रेस्पिरेटरी सपोर्ट सिस्टम की भारी कमी देखने को मिली थी। उस समय पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा HFNC सिस्टम विकसित किया, जो गंभीर श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों के उपचार में प्रभावी साबित हुआ।ट्रूऑक्सी+ HFNC सिस्टम मरीज को उच्च प्रवाह में नियंत्रित तापमान और नमी के साथ ऑक्सीजन प्रदान करता है।यह तकनीक कोविड-19,निमोनिया, तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (ARDS) और अन्य गंभीर सांस संबंधी बीमारियों के इलाज में उपयोगी मानी जाती है। इसके इस्तेमाल से कई मामलों में मरीजों को वेंटिलेटर पर जाने से बचाया जा सकता है, जिससे इलाज की जटिलता और लागत दोनों कम होती हैं।
अब तक इस तरह की चिकित्सा तकनीक के लिए भारत को बड़े पैमाने पर आयातित उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्वदेशी HFNC सिस्टम के विकसित होने और उसके व्यावसायीकरण से न केवल विदेशी निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के अस्पतालों को कम लागत पर आधुनिक तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट के तहत क्लेरिटी मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड इस सिस्टम का बड़े स्तर पर निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन करेगी। वहीं, पीजीआई चंडीगढ़ द्वारा विकसित तकनीकी मानकों और अनुसंधान को इस उत्पादन का आधार बनाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपकरण अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरे।
पीजीआई के अधिकारियों ने इस उपलब्धि को संस्थान की अनुसंधान क्षमता का परिणाम बताया और कहा कि यह समझौता शोध को सीधे मरीजों तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम है। वहीं, क्लेरिटी मेडिकल प्रबंधन ने विश्वास जताया कि स्वदेशी HFNC सिस्टम देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में जल्द उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पहल को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में अन्य उन्नत मेडिकल उपकरणों के स्वदेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।