नई दिल्ली 13 जनवरी( दैनिक खबरनामा) नई दिल्ली पांच वर्षीय भारतीय बच्ची अरिहा शाह को लेकर भारत और जर्मनी के बीच चला आ रहा संवेदनशील मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जर्मनी में चार वर्ष पहले कथित बाल उत्पीड़न के आरोपों के आधार पर अरिहा को उसके माता-पिता से अलग कर दिया गया था। अब सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने जर्मन सरकार पर अरिहा के मानवाधिकारों और सांस्कृतिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर उठाएं। चांसलर मर्ज़ सोमवार (12 जनवरी, 2026) को भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं, जो चांसलर बनने के बाद उनकी पहली भारत और एशिया यात्रा होगी।बताया गया है कि जर्मनी के अधिकारियों का कहना है कि अरिहा की उसके माता-पिता और जर्मनी स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों से नियमित मुलाकात कराई जा रही है। हालांकि, भारत सरकार की उस मांग पर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसमें अरिहा को भारत लाकर किसी भारतीय परिवार या फोस्टर केयर में पाले जाने की अनुमति मांगी गई है।भारत सरकार ने कई बार औपचारिक रूप से जर्मन प्रशासन से अपील की है कि अरिहा शाह, जो एक भारतीय नागरिक है, उसे भारत लौटने दिया जाए ताकि वह अपनी संस्कृति, भाषा और पारिवारिक वातावरण में परवरिश पा सके। लेकिन जर्मन सरकार ने अब तक इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी बच्चे को उसकी सांस्कृतिक जड़ों, माता-पिता और मूल पहचान से दूर रखना अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार संधियों का उल्लंघन है। उनका आरोप है कि जर्मनी इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने में विफल रहा है।गौरतलब है कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ अपनी भारत यात्रा की शुरुआत अहमदाबाद से करेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है। इस दौरान व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ अरिहा शाह का मामला भी चर्चा में आने की संभावना है।अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या भारत सरकार इस भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दे पर कोई ठोस कूटनीतिक सफलता हासिल कर पाती है या नहीं।