नई दिल्ली 30 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा ) नई दिल्ली।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला गुरुवार को सदन में अनुशासन को लेकर बेहद सख्त नजर आए। प्रश्नकाल के दौरान जब कुछ सांसद आपस में लगातार बातचीत करते हुए व्यवधान पैदा कर रहे थे, तो अध्यक्ष ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी सदस्य को लंबी बातचीत करनी है तो वह सदन से बाहर जाकर करें, सदन के भीतर इस तरह की चर्चा लोकसभा की मर्यादा और गरिमा के खिलाफ है।अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, “मैं लगातार देख रहा हूं कि कुछ सदस्य एक-दूसरे से बात कर रहे हैं, जिससे प्रश्नकाल में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। सदन में संक्षिप्त बातचीत की अनुमति है, लेकिन लंबी-लंबी चर्चाएं अस्वीकार्य हैं। यह सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आगे से यदि इस तरह की स्थिति बनी रही तो वह संबंधित सदस्यों के नाम आसन से पुकारेंगे।केसी वेणुगोपाल को नाम लेकर किया आगाह
इस दौरान अध्यक्ष ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम लेकर उन्हें अपने साथी सांसदों से बातचीत न करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।प्रश्नकाल को लेकर भी दिया अहम बयानप्रश्नकाल की शुरुआत में ओम बिरला ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी कोशिश रहेगी कि प्रश्नकाल के दौरान सूचीबद्ध सभी 20 सवालों पर चर्चा हो सके, ताकि अधिक से अधिक सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।जब कुछ सदस्यों ने पूरक प्रश्न पूछने की मांग की, तो अध्यक्ष ने कहा, “अगर सभी को पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति दी गई, तो जिन सांसदों के सवाल सूचीबद्ध हैं, उनके साथ अन्याय होगा। इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।डिजिटल व्यवस्था पर जोर, व्हाट्सएप से मिलेगी आर्थिक समीक्षा
प्रश्नकाल के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को जानकारी दी कि सांसदों को अब आर्थिक समीक्षा की डिजिटल प्रति व्हाट्सएप के जरिए भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका असर आने वाले दिनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
मंत्री को भी लगाई फटकार, जेब में हाथ डालकर बोलने पर टोका
लोकसभा में अनुशासन का उदाहरण पेश करते हुए अध्यक्ष ने जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को भी टोका। जब वह एक प्रश्न का उत्तर देने के लिए खड़े हुए, तो उनके हाथ जेब में थे। इस पर ओम बिरला ने सख्ती से कहा, “मंत्रीजी, जेब में हाथ डालकर मत बोलिए।” मंत्री ने तुरंत अध्यक्ष की बात मानी, हाथ जेब से निकाला और फिर अपना उत्तर पूरा किया।सख्त संदेश संसद की गरिमा सर्वोपरि ओम बिरला के इस रुख को संसद की गरिमा बनाए रखने की दिशा में सख्त और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उन्होंने साफ कर दिया कि सदन की कार्यवाही के दौरान अनुशासन, मर्यादा और व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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