चंडीगढ़ 24 फरवरी 2026(दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ के District Consumer Disputes Redressal Commission-II ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर मोटर बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि वाहन के पास किसी विशेष क्षेत्र का रूट परमिट नहीं था, जब तक कि उस कमी का दुर्घटना से कोई सीधा संबंध न हो।
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता सुखवीर सिंह को 3,07,790 रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 1 जुलाई 2020 से भुगतान तक अदा करे। साथ ही 25,000 रुपये मुआवजा और मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर देने के निर्देश भी दिए गए।शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका ट्रक 18 अगस्त 2018 से 17 अगस्त 2019 तक United India Insurance Company Limited के साथ बीमित था। 9 जुलाई 2019 को सेक्टर 25/38 (वेस्ट), चंडीगढ़ में ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वाहन को भारी नुकसान हुआ। अधिकृत वर्कशॉप ने मरम्मत का बिल 3,07,790 रुपये का जारी किया।
बीमा कंपनी ने सर्वेयर नियुक्त कर नुकसान का आकलन तो किया, लेकिन 1 जुलाई 2020 को पत्र जारी कर यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि ट्रक के पास चंडीगढ़ का वैध रूट परमिट नहीं था, जबकि उसके पास पंजाब का वैध परमिट मौजूद था।
दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद आयोग ने माना कि पूर्ण रूप से परमिट का अभाव और केवल क्षेत्रीय परमिट में कथित अनियमितता अलग-अलग बातें हैं। चंडीगढ़ परमिट का न होना दुर्घटना या नुकसान का कारण नहीं था, इसलिए इसे दावा खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।आयोग ने Punjab and Haryana High Court, National Consumer Disputes Redressal Commission और Supreme Court of India के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि तकनीकी या मामूली त्रुटियों को मूल शर्तों का उल्लंघन मानकर बीमा दावा अस्वीकार करना उचित नहीं है, जब तक वे नुकसान का कारण न बनी हों।आयोग ने बीमा कंपनी की कार्रवाई को मनमाना और सेवा में कमी करार देते हुए दावा राशि ब्याज सहित अदा करने और अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश सुनाया।