दैनिक खबरनामा 25 मार्च 2026 हरियाणा में पंचकूला से लेकर यमुनानगर के कलेसर जंगल क्षेत्र तक खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पूरे वन विभाग को हिला कर रख दिया है। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि यह कोई एक-दो घटनाओं तक सीमित मामला नहीं, बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक संगठित ‘ग्रीन सिंडिकेट’ का काम है, जो सुनियोजित तरीके से वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहा था।यमुनानगर के दारपुर क्षेत्र से हिमाचल सीमा तक फैले जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के ठोस सबूत मिले हैं। जांच में पंचकूला के आसरेवाला जंगल, मोरनी-पिंजौर बेल्ट और दारपुर की विभिन्न खोहों समेत कांसली, खादरी, टिबरियों, आमवाली, नंगली और फलोड़ी जैसे क्षेत्रों में खैर के पेड़ों के ताजा ठूंठ, कटे अवशेष और अवैध रास्तों के निशान मिले हैं। इससे वन विभाग के अंदरूनी नेटवर्क पर भी संदेह गहरा गया है।मामले का खुलासा 2 मार्च 2026 को आसरेवाला जंगल से हुआ, जिसके बाद वन विभाग और पंचकूला पुलिस की एसआईटी ने संयुक्त जांच शुरू की। अब तक एक वन दरोगा सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस पूरे मामले में वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब तक दो डीएफओ, दो इंस्पेक्टर और एक कर्मचारी समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि सात अन्य अधिकारी जांच के दायरे में हैं।वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल जांच को और अहम बना रहे हैं।