दैनिक खबरनामा 31 मार्च 2026 पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सरकार का नीतिगत निर्णय है और ऐसे मामलों में न्यायालय आमतौर पर दखल नहीं देता।हालांकि कोर्ट ने यह टिप्पणी जरूर की कि यदि योजना को केवल उन लोगों तक सीमित किया जाता, जो यात्रा का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं, तो यह अधिक न्यायसंगत होता।मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने यह फैसलाआरटीआई कार्यकर्ता परविंदर सिंह किटना की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि योजना में आय का कोई मापदंड तय नहीं है, जिससे आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी इसका लाभ उठा सकते हैं। साथ ही इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया गया।याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि 20 नवंबर 2023 को शुरू की गई यह योजना लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लागू की गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला भी दिया गया, जिसमें हज सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की बात कही गई थी, ताकि धन का उपयोग शिक्षा और सामाजिक विकास में किया जा सके।अंत में हाईकोर्ट ने कहा कि नीतिगत मामलों में उसका हस्तक्षेप सीमित होता है, लेकिन याचिकाकर्ता को अपनी आपत्तियां और सुझाव राज्य सरकार के समक्ष रखने की स्वतंत्रता है। साथ ही राज्य सरकार को इन सुझावों पर विचार कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
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