चंडीगढ़ 8 जनवरी (जगदीश कुमार) चंडीगढ़आम आदमी पार्टी (AAP) ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी आगामी चुनावों में अकेले दम पर मैदान में उतरेगी और कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। यह घोषणा शहर में होने वाले मेयर चुनाव से कुछ सप्ताह पहले की गई है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही चंडीगढ़ AAP के प्रभारी और वरिष्ठ नेता जरनैल सिंह ने कांग्रेस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ “सत्ता-साझेदारी” की अंदरूनी समझ होने का आरोप लगाया था। AAP का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे मिलीभगत है, जिसका नुकसान शहर के लोकतंत्र और विकास को हो रहा है।चंडीगढ़ AAP के सह-प्रभारी सनी सिंह अहलूवालिया ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन केवल 2024 के लोकसभा चुनावों तक सीमित था और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद इसका औपचारिक रूप से अंत कर दिया गया था। ऐसे में नगर निगम चुनावों में कांग्रेस के साथ किसी तरह का तालमेल नहीं होगा।अहलूवालिया ने बताया कि पिछले वर्ष मेयर चुनाव के दौरान AAP और कांग्रेस के बीच जो ‘एडजस्टमेंट’ हुआ था, वह अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।BJP पर तीखा हमला बोलते हुए अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि भाजपा हर चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग का सहारा लेती है और अन्य दलों के पार्षदों को पैसे और दबाव के जरिए अपने पक्ष में करती है। उन्होंने कहा कि पिछले नगर निगम चुनाव में भाजपा के केवल 12 पार्षद चुने गए थे, लेकिन बाद में उनकी संख्या बढ़कर 18 हो गई, जो निष्पक्ष राजनीति पर सवाल खड़े करता है।AAP नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चंडीगढ़ के विकास के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया है। उन्होंने कहा कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग में गिरावट आई है और मनीमाजरा की कीमती जमीन बेचने की कोशिश का AAP पार्षदों ने विरोध किया था। उन्होंने मनीमाजरा में 24 घंटे जलापूर्ति परियोजना को भी “भ्रष्टाचार का उदाहरण” करार दिया।मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर पूछे गए सवाल पर अहलूवालिया ने कहा कि पार्टी इस पर अंतिम निर्णय नामांकन की अंतिम तिथि से पहले लेगी।गौरतलब है कि चंडीगढ़ नगर निगम सदन में कुल 35 सदस्य हैं और चंडीगढ़ सांसद को भी मतदान का अधिकार प्राप्त है। वर्तमान में भाजपा के पास 18, कांग्रेस के पास 6 और आम आदमी पार्टी के पास 11 सदस्य हैं। मेयर चुनाव जीतने के लिए भाजपा को केवल एक अतिरिक्त वोट की जरूरत है, जिससे राजनीतिक समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं।
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