दैनिक खबरनामा 31 मार्च 2026 Supreme Court of India ने कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करते हुए अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी से वर्षों तक लगातार काम लिया जाता है, तो उस कार्य को स्थायी माना जाएगा और ऐसे कर्मचारी को अस्थायी कहकर हटाना उचित नहीं है। न्यायमूर्ति Manoj Misra और Manmohan की पीठ ने Allahabad High Court का फैसला रद्द करते हुए प्रभावित कर्मचारियों की बहाली का आदेश दिया।यह मामला Kanpur Nagar Nigam के स्विचमैन कर्मचारियों से जुड़ा था, जो 1993 से 2006 तक लगातार काम कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि 12-13 वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी को अस्थायी बताना गलत है, क्योंकि इतनी लंबी अवधि यह साबित करती है कि उस पद पर नियमित नियुक्ति की आवश्यकता थी।सुनवाई के दौरान नगर निगम कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इस पर अदालत ने ‘प्रतिकूल अनुमान’ के सिद्धांत को लागू करते हुए कहा कि यदि संस्थान रिकॉर्ड नहीं दिखाता, तो कर्मचारी का दावा सही माना जाएगा। कोर्ट ने श्रम न्यायालय के फैसले को सही ठहराया और बहाली का आदेश बरकरार रखा। हालांकि, बकाया वेतन के मुद्दे पर पुनर्विचार के लिए मामला फिर से हाईकोर्ट भेजा गया है।दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में जमीन विवादों के निपटारे के लिए अलग राजस्व न्यायिक सेवा गठित करने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। वकील Ashwini Upadhyay ने दलील दी कि अधिकांश दीवानी मामले भूमि विवादों से जुड़े हैं, लेकिन इनका निपटारा ऐसे अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है जिनके पास पर्याप्त कानूनी प्रशिक्षण नहीं है। इस पर अदालत 2 अप्रैल को सुनवाई कर सकती है।

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