दैनिक खबरनामा 4 अप्रैल 2026 जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा है कि न्याय व्यवस्था को समाज की बदलती जरूरतों, तकनीकी प्रगति और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं के अनुरूप लगातार विकसित होना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में डिजिटल उपकरणों की अहम भूमिका पर जोर दिया।वह गुजरात के जिला न्यायपालिका के जजों के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय था ‘न्याय व्यवस्था को नया रूप देना—रूढ़ियों से परे जाना’।जस्टिस नाथ ने कहा कि न्यायपालिका केवल फैसले देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह अधिकारों की रक्षा, कानून के शासन को बनाए रखने और शासन में जनता के विश्वास को मजबूत करने का कार्य भी करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की वैधता केवल उसके निर्णयों की सटीकता पर ही नहीं, बल्कि उसकी सुलभता, दक्षता और जवाबदेही पर भी निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को नया रूप देना उसके मूल सिद्धांतों से दूर जाना नहीं, बल्कि वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार उन्हें और मजबूत करना है।जस्टिस नाथ ने जजों की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि उनका काम केवल अदालत तक सीमित नहीं है। एक जज को कानून के साथ-साथ समाज की बदलती परिस्थितियों और वास्तविकताओं से भी लगातार जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जज जीवनभर सीखने वाला विद्यार्थी होता है, जिसे हर मामले को बिना पूर्वाग्रह के नए नजरिए से देखने की क्षमता विकसित करनी चाहिए, ताकि निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित हो सके।

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