दैनिक खबरनामा 21 अप्रैल 2026 Supreme Court of India में केरल के Sabarimala Temple सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और कथित भेदभाव से जुड़े मामलों पर अहम सुनवाई जारी है। इसके लिए 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित की गई है, जो वर्ष 2018 के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं पर विचार कर रही है। यह मामला देश में धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सुनवाई के दौरान जस्टिस Ahsanuddin Amanullah ने महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी आस्थावान व्यक्ति को देवता को छूने या पूजा करने से रोका जाता है, तो क्या ऐसे में संविधान उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा? अदालत यह भी जांच रही है कि क्या परंपरा या जन्म के आधार पर किसी को पूजा-अधिकार से वंचित करना उचित है।मंदिर पक्ष की ओर से दलील दी गई कि पूजा की परंपराएं और अनुष्ठान धर्म का अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के तहत संरक्षण मिलना चाहिए। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को मंदिर की परंपराओं को स्वीकार करना होता है।इस मामले के साथ-साथ अदालत Article 25 of the Indian Constitution के तहत धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विचार कर रही है। इनमें मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अग्नि मंदिर में अधिकार, बहिष्कार की प्रथाओं की वैधता और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला जननांग विकृति जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के लिए सख्त समयसीमा तय की है। सभी पक्षों को निर्धारित समय में अपनी दलीलें पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने समीक्षा याचिकाओं का समर्थन किया है, जबकि Travancore Devaswom Board ने धर्म की समुदाय आधारित व्याख्या की मांग रखी है।