दैनिक खबरनामा 10 अप्रैल 2026 आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सरकारी फंड के कथित गबन मामले में गठित राज्य स्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता ने रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी धन की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।रिपोर्ट के अनुसार, अब किसी भी बैंक में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के मैच्योर होने पर उसे उसी बैंक में दोबारा जमा नहीं किया जाएगा, बल्कि दूसरी बैंक में ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा। इससे मूलधन और ब्याज की सही निगरानी संभव हो सकेगी। साथ ही, हर एफडी पर लागू ब्याज दर और जमा हुए ब्याज का प्रमाण पत्र लेना भी जरूरी होगा।कमेटी ने पाया कि कई विभाग एफडी मैच्योर होने के बाद उसी बैंक में दोबारा निवेश करते रहे, जिससे पारदर्शिता में कमी आई। उदाहरण के तौर पर, कोटक महिंद्रा बैंक में मैच्योर हुई एफडी की उचित जांच नहीं की गई।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी नया बैंक खाता नहीं खोला जाएगा। जांच में सामने आया कि कई विभागों ने अपनी मर्जी से निजी बैंकों में खाते खोल रखे थे।इसके अलावा, किसी एक विभाग या उपक्रम की पूरी राशि एक ही बैंक में नहीं रखी जाएगी। यदि किसी के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि है, तो उसका कम से कम आधा हिस्सा दूसरे बैंक में रखना होगा। वर्ष 2024 में सूचीबद्ध बैंकों में ही सरकारी धन जमा किया जाएगा, जिसमें निजी बैंक भी शामिल हैं।रिपोर्ट मिलने के बाद वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों को अपने बैंक खातों और एफडी की तुरंत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बैंकों द्वारा दी गई ब्याज दरों और वास्तविक जमा ब्याज का मिलान करने को कहा गया है। यदि किसी भी खाते में ब्याज कम पाया जाता है, तो संबंधित बैंक से तुरंत अंतर राशि वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।