दैनिक खबरनामा। रिकांग पिओ (किन्नौर), 15 जून : जिला किन्नौर के दूरदराज रूपी क्षेत्र में सोमवार सुबह मौसम ने अचानक करवट लेते हुए किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी। सुबह करीब 7 बजे से 8 बजे तक लगातार एक घंटे तक हुई भीषण ओलावृष्टि ने क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, तीन से चार इंच तक ओले गिरे, जिससे सेब, खुबानी (जूली), आलू, प्लम तथा अन्य नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ओलावृष्टि इतनी तीव्र थी कि खेतों और बगीचों में बर्फ जैसी परत जम गई। सबसे ज्यादा असर उन फसलों पर पड़ा है जो इस समय फल बनने और वृद्धि की अवस्था में हैं। सेब उत्पादकों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा का असर न केवल मौजूदा फसल पर पड़ेगा, बल्कि आगामी सीजन की आय भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, राजस्व विभाग और उद्यान विभाग की ओर से अभी तक नुकसान का आधिकारिक आकलन नहीं किया गया है। विभागीय टीमें जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वास्तविक क्षति का आकलन करेंगी, जिसके बाद नुकसान की सही तस्वीर सामने आ सकेगी।
स्थानीय किसानों और बागवानों ने मौजूदा मुआवजा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरी फसल नष्ट होने की स्थिति में प्रति बीघा मिलने वाला 600 से 700 रुपये का मुआवजा वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद कम है। प्रभावित लोगों ने सरकार से विशेष राहत पैकेज जारी करने और फसल क्षति का यथार्थवादी मूल्यांकन करने की मांग की है।
इस अप्रत्याशित ओलावृष्टि ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और किसानों-बागवानों के सामने बढ़ती चुनौतियों को उजागर कर दिया है। यदि जल्द राहत और सहायता नहीं मिली, तो इसका सीधा असर क्षेत्र की बागवानी और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।