दैनिक खबरनामा | 9 जून, 2026 वॉशिंगटन: अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा याचिकाओं पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के अतिरिक्त शुल्क को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह शुल्क वास्तव में एक नया टैक्स था, जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश Leo T. Sorokin ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को इमिग्रेशन मामलों में व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन वे कांग्रेस द्वारा निर्धारित संवैधानिक सीमाओं से ऊपर नहीं हैं। अदालत ने माना कि जिन कानूनों का हवाला देकर यह शुल्क लगाया गया था, वे राष्ट्रपति या सरकारी एजेंसियों को नया टैक्स लगाने की अनुमति नहीं देते।
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह शुल्क विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर नियंत्रण से जुड़ा एक इमिग्रेशन उपाय है, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि “टैक्स को प्रतिबंध का नाम देकर उसकी प्रकृति नहीं बदली जा सकती।”
फैसले में यह भी कहा गया कि संबंधित एजेंसियां अपने वैधानिक अधिकारों से आगे बढ़ गईं और उन्होंने आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया का पर्याप्त पालन नहीं किया। अदालत ने इस नीति को पूरे देश में लागू होने से रोकते हुए पूरी तरह निरस्त कर दिया।
यह फैसला H-1B वीज़ा कार्यक्रम के तहत विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने वाली कंपनियों और आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, संघीय सरकार के पास इस निर्णय को उच्च अदालत में चुनौती देने का विकल्प अभी भी मौजूद है।
सार: अदालत ने स्पष्ट किया कि इमिग्रेशन नीति बनाना और नया टैक्स लगाना दो अलग-अलग बातें हैं, और बिना कांग्रेस की अनुमति के राष्ट्रपति प्रशासन नया टैक्स नहीं लगा सकता।