दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 9 जून : भारत की एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट में नकदी संकट गहराने के कारण कई पायलटों के वेतन का भुगतान मार्च महीने से लंबित है। आर्थिक दबाव का सामना कर रही एयरलाइन ने बताया है कि वह अपने परिचालन को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार समर्थित ऋण गारंटी योजना के तहत आपातकालीन ऋण प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
वर्ष 2019 में स्पाइसजेट भारत की दूसरी सबसे बड़ी घरेलू विमान सेवा कंपनी थी और देश के लगभग 15 प्रतिशत हवाई यात्रियों को सेवा प्रदान करती थी। हालांकि, इसके बाद कंपनी की बाजार हिस्सेदारी लगातार घटती गई और अब यह केवल 3.4 प्रतिशत रह गई है, जिससे कंपनी चौथे स्थान पर पहुंच गई है।
कंपनी की लंबे समय से चली आ रही वित्तीय समस्याएं हाल के वर्षों में और गंभीर हो गई हैं। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है तथा कई हवाई मार्गों तक पहुंच सीमित हो गई है। इन चुनौतियों का असर केवल स्पाइसजेट ही नहीं बल्कि बड़ी एयरलाइनों इंडिगो और एयर इंडिया पर भी पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, मार्च तक स्पाइसजेट में 375 पायलट कार्यरत थे और उनमें से कई के वेतन का भुगतान कई महीनों से लंबित है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह निश्चित रूप से कठिन समय है, लेकिन यह स्थिति अस्थायी है।”
एयरलाइन ने अपने बयान में कहा कि कर्मचारियों को वेतन का भुगतान पिछले कई महीनों से अपनाई जा रही प्रक्रिया के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और अधिकांश कर्मचारियों को मार्च महीने का वेतन पहले ही दिया जा चुका है।
वहीं कुछ पायलटों ने बताया कि वेतन में देरी के कारण उनके लिए रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना बेहद कठिन हो गया है। उनका कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि आवश्यक वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए उन्हें दूसरों से आर्थिक सहायता लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी को जल्द वित्तीय सहायता नहीं मिली तो उसके परिचालन और कर्मचारियों पर दबाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, स्पाइसजेट को उम्मीद है कि सरकारी समर्थन वाली ऋण योजना से मिलने वाली संभावित सहायता उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगी।