दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 4 जून 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए 10,000 करोड़ रुपये तक की ब्याज-मुक्त एकमुश्त बजटीय सहायता को मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना और एयरलाइंस की परिचालन लागत को स्थिर बनाए रखना है, जिससे हवाई किरायों में अचानक बढ़ोतरी की आशंका कम होगी।

सरकार ने एटीएफ कीमतों में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए मूल्य स्थिरीकरण फंड बनाने का निर्णय लिया है। इस फंड के माध्यम से ओएमसी को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वैश्विक बाजार में ईंधन कीमतों में तेजी का असर सीधे विमानन कंपनियों और यात्रियों पर न पड़े।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव

सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यह वृद्धि विमानन कंपनियों की लागत पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।

एटीएफ किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। इसके अलावा, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों के मार्ग लंबे हो गए हैं, जिससे ईंधन खपत और परिचालन खर्च में और वृद्धि हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या, किरायों और मांग पर भी देखा जा रहा है।

पूरे विमानन इकोसिस्टम को मिलेगा लाभ

सरकार का मानना है कि यह राहत पैकेज केवल एयरलाइंस ही नहीं, बल्कि हवाई अड्डों, एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सेवाओं और एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स सहित पूरे विमानन इकोसिस्टम को सहारा देगा।

योजना के तहत यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें निर्धारित बेंचमार्क से अधिक रहती हैं, तो फंड के माध्यम से ओएमसी को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाएगी। वहीं, कीमतों में स्थिरता आने पर अतिरिक्त सहायता राशि सरकार को वापस लौटाई जाएगी।

36 महीने तक लागू रहेगी योजना

यह योजना तीन वर्षों (36 महीने) के लिए लागू रहेगी और इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी। योजना का लाभ सभी भारतीय अनुसूचित एयरलाइंस को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों के लिए मिलेगा।

हालांकि, योजना की एक प्रमुख शर्त यह है कि लाभ प्राप्त करने वाली एयरलाइंस को अधिकतम तीन वर्षों तक एटीएफ की खरीद केवल ओएमसी से ही करनी होगी।

निगरानी और ऑडिट की होगी सख्त व्यवस्था

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा व्यय विभाग के अधिकारियों की एक निगरानी समिति गठित की जाएगी। यह समिति दावों के सत्यापन, भुगतान, मिलान और निपटान की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही, सभी दावों और वसूली की नियमित ऑडिट भी कराई जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण एक अस्थायी राहत उपाय है, जिसका उद्देश्य वर्तमान वैश्विक संकट के दौरान विमानन क्षेत्र को सहारा देना और यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने से बचाना है।

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