दैनिक खबरनामा | 02 जुलाई , 2026
बीजिंग : भारत जहां मुंबई-अहमदाबाद के बीच अपनी पहली बुलेट ट्रेन सेवा अगले वर्ष शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है, वहीं चीन ने हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। चीन ने किनलिंग पर्वतमाला के कठिन भूभाग को पार करते हुए केवल चार वर्षों में नया हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तैयार कर लिया है। इस 257 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर बुलेट ट्रेनें 350 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से संचालित होंगी।
यह नई रेल लाइन शियान और जिनयान शहरों को जोड़ती है। मार्ग का बड़ा हिस्सा सुरंगों और ऊंचे पुलों से होकर गुजरता है, जिससे उत्तर-पश्चिमी चीन के प्रमुख शहरों का यांगजी नदी के पार स्थित क्षेत्रों से संपर्क और अधिक मजबूत होगा।
यात्रा अवधि में उल्लेखनीय कमी
शांग्जी प्रांत की राजधानी शियान को पड़ोसी हुबेई प्रांत के जिनयान से जोड़ने वाले इस नए कॉरिडोर के शुरू होने से 257 किलोमीटर के सफर में करीब छह घंटे की बचत हुई है। वहीं, शियान और हुबेई की राजधानी वुहान के बीच लगभग 800 किलोमीटर की दूरी, जिसे पहले तय करने में 5 से 6 घंटे लगते थे, अब केवल 2 घंटे 41 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
किनलिंग पर्वत श्रृंखला का दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ भूभाग इस परियोजना के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों की मदद से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
करीब 66,600 करोड़ रुपये की लागत
इस हाई-स्पीड रेल परियोजना पर चीन ने लगभग 7 अरब डॉलर, यानी करीब 66,600 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। किनलिंग पर्वतमाला उत्तर और दक्षिण चीन के बीच प्राकृतिक विभाजन का काम करती है, जबकि इस क्षेत्र से यांगजी और हानशियांग जैसी प्रमुख नदियां भी गुजरती हैं।
परियोजना के मुख्य डिजाइनर माओ लेई के अनुसार, 244 किलोमीटर लंबे रेलवे रूट का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पुलों और सुरंगों पर आधारित है, जो इस परियोजना को इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण बनाता है।
42 सुरंगें और 62 पुल बने
इस हाई-स्पीड रेल लाइन के निर्माण के दौरान कुल 42 सुरंगें और 62 पुल तैयार किए गए हैं। पहाड़ी और गहरी घाटियों वाले इलाके में इस स्तर का रेल नेटवर्क विकसित करना चीन के रेलवे इंजीनियरों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह नया मार्ग आगे चलकर हांकू-शियां हाई-स्पीड रेलवे से जुड़ता है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। तेज गति से गुजरने वाली ट्रेनों के दौरान सुरंगों में निर्बाध संचार सुनिश्चित करने के लिए विशेष बेस स्टेशन स्थापित किए गए हैं तथा दीवारों पर विशेष केबल बिछाई गई हैं, ताकि पूरे मार्ग में सिग्नल की गुणवत्ता बनी रहे।