दैनिक खबरनामा ब्यूरो। माॅस्को , 14 जुलाई: भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने सोमवार रात अंतरिक्ष के लिए पहली बार उड़ान भरकर एक नई उपलब्धि हासिल की है। वे अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर करीब आठ महीने तक रहकर शोध करेंगे।
मेनन ने कजाकिस्तान स्थित बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रूसी यान सोयुज MS-29 के जरिए अंतरिक्ष के लिए प्रस्थान किया। इस मिशन में उनके साथ रूस के दो अनुभवी कॉस्मोनॉट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार यह यान मंगलवार रात 8:17 बजे लॉन्च हुआ। अनुमान है कि लगभग तीन घंटे में यह ISS से जुड़ जाएगा। यह दल 2027 में पृथ्वी पर लौटेगा और तब तक स्टेशन पर विभिन्न प्रयोग करेगा।
ISS पर क्या करेंगे अनिल मेनन
आठ महीने के प्रवास के दौरान मेनन मानव शरीर पर अंतरिक्ष के असर का अध्ययन करेंगे। इसके तहत वे यह देखेंगे कि सूक्ष्म गुरुत्व में रक्त का संचार, नसों की संरचना और रक्त के घटकों में किस तरह के बदलाव आते हैं।
इसके साथ ही वे स्टेशन पर मौजूद पानी से ग्लूकोज और सलाइन तैयार करने की नई तकनीक को भी परखेंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में चंद्रमा और मंगल के लंबे अभियानों के लिए उपयोगी साबित होगी।
NASA के मुताबिक, मेनन इस मिशन में AI और ऑगमेंटेड रियलिटी आधारित उन्नत मेडिकल जांच और अल्ट्रासाउंड परीक्षणों में भी भूमिका निभाएंगे।
कौन हैं अनिल मेनन
49 वर्षीय अनिल मेनन का भारत से गहरा जुड़ाव है। उनके पिता भारतीय हैं और मां यूक्रेन से हैं। उनका जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ। उन्होंने न्यूरोबायोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और मेडिसिन में पढ़ाई की है। पेशे से इमरजेंसी चिकित्सक होने के साथ-साथ वे अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर भी हैं।
वायुसेना में रहते हुए उन्होंने अफगानिस्तान में सेवा दी। इसके अलावा वे हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की मदद की।
मेनन एक साल तक भारत में रोटरी स्कॉलर के तौर पर रहे। इस दौरान उन्होंने पोलियो टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने में सहयोग किया।
2014 में वे NASA में फ्लाइट सर्जन के रूप में शामिल हुए। 2018 में वे स्पेसएक्स से जुड़े और वहां मेडिकल प्रोग्राम की शुरुआत की। साथ ही उन्होंने स्टारशिप रॉकेट के विकास में भी योगदान दिया। दिसंबर 2021 में NASA ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना था।