दैनिक खबरनामा। कोलकाता, 16 अगस्त: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा झटका। बीरभूम जिले के रामपुरहाट से पांच बार विधायक और पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी रविवार सुबह मृत पाए गए। 75 वर्षीय बनर्जी का शव उनके घर के पास स्थित तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर में फंदे से लटका मिला।
पुलिस के मुताबिक घटना रविवार सुबह की है। मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है, जिसके बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था
नोट में बनर्जी ने साफ लिखा है कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीति में आना उनके जीवन का सबसे बड़ा निर्णय साबित हुआ।
पेशे से शिक्षक रहे बनर्जी ने अपने नाम के साथ ईमानदारी का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कभी एक रुपया भी गलत तरीके से नहीं लिया और हमेशा बिना फीस के बच्चों को पढ़ाया।
इसके साथ ही उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी टीआरडीए में खुद को हाशिए पर धकेलने और अपनी छवि खराब करने की कोशिशों का उल्लेख किया। नोट में उन्होंने कहा कि वे किसी भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं रहे, बावजूद इसके उन्हें अपमान सहना पड़ा। अंत में उन्होंने अपने परिवार की आने वाली पीढ़ियों को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।
रामपुरहाट थाना पुलिस ने कहा है कि नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।
लंबा राजनीतिक सफर
आशीष बनर्जी 2001 से 2026 तक लगातार रामपुरहाट सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में वे विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे। पहली बार सत्ता में आने पर ममता सरकार में उन्होंने शिक्षा और कृषि विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली थी।
हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के उम्मीदवार ध्रुव साहा ने हरा दिया था। हार के बाद से वे सार्वजनिक जीवन से कुछ हद तक दूर थे।
उनके निधन की खबर के बाद तृणमूल कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक जताया है। हाल के समय में सत्ता समीकरण बदलने और कई टीएमसी नेताओं पर बढ़ते दबाव के बीच इस घटना ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।