दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 23 जुलाई: दो दिवसीय 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक बुधवार को चंडीगढ़ में संपन्न हो गई। इस बैठक में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता इस वर्ष भारत कर रहा है। समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि इस मंच पर दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक साथ आए और नौ महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
उन्होंने बताया कि बैठक का मुख्य फोकस टीबी के खिलाफ शोध नेटवर्क को सुदृढ़ करना, डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक बनाना और पारंपरिक तथा एकीकृत चिकित्सा पद्धतियों को विस्तार देना रहा। पटेल के अनुसार इस संवाद से सदस्य और साझेदार राष्ट्रों के बीच स्वास्थ्य सहयोग को नई गति मिलेगी। इससे आने वाले समय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शोध कार्य और तकनीकी नवाचारों को बल मिलेगा। साथ ही वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य चुनौतियों का मिलकर समाधान निकालने में भी मदद मिलेगी।
पारंपरिक चिकित्सा के लिए गठित होगा विशेष समूह
बैठक के दौरान केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने जानकारी दी कि सभी ब्रिक्स देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति व्यक्त की है।
जाधव ने कहा कि भारत की आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक उपचार की परंपरा करीब 5000 वर्ष पुरानी है और इसे हमारे ऋषियों ने विकसित किया था। आज ये पद्धतियां विश्व भर में लोकप्रिय हो रही हैं।
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बीते 10 से 12 वर्षों में आयुष उत्पादों के निर्यात में लगभग दस गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ हुए वैश्विक सम्मेलन में 127 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उस दौरान कई देशों ने अपने यहां आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाने में रुचि दिखाई।
प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण पर काम कर रहा है जिसके तहत भारत की पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है। ब्रिक्स देशों का यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देगा और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।