दैनिक खबरनामा 30 अप्रैल 2026 जिन हाथों की पहचान कभी जुर्म से थी, आज वही हाथ मेहनत और हुनर से नई कहानी लिख रहे हैं। Lala Lajpat Rai District and Open Correctional Home, Dharamshala में सजा काट रहे कैदियों ने बीते वित्तीय वर्ष में 10 स्वरोजगार इकाइयों के जरिए 1 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपये की कमाई कर नया रिकॉर्ड बनाया है।जेल में कारपेंटरी, पॉलीहाउस, नर्सरी, बेकरी, टेलरिंग, लांड्री, कार वॉशिंग, डेयरी, सब्जी उत्पादन और बैंबू कैंटीन जैसी इकाइयां संचालित हो रही हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच इन इकाइयों ने कुल 1.42 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 47 लाख रुपये अधिक है। दो साल पहले भी यह आंकड़ा एक करोड़ के पार गया था, लेकिन 2024-25 में इसमें गिरावट आई थी।इस वर्ष कैदियों की मेहनत और कौशल ने न सिर्फ पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि जेल प्रशासन के सुधारात्मक प्रयासों को भी नई पहचान दी। कोई कैदी कार वॉशिंग यूनिट में गाड़ियों को चमका रहा है, तो कोई डेयरी में दूध उत्पादन बढ़ा रहा है। वहीं कुछ कैदी खेतों में सब्जियां उगाकर और बेकरी-कैंटीन का संचालन कर आमदनी बढ़ा रहे हैं। कारपेंटरी इकाई में तैयार और रिपेयर हो रहे फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है।
Dr. Rajendra Prasad Government Medical College, केंद्रीय विश्वविद्यालय, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला कॉलेज और गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा जैसे संस्थानों से फर्नीचर, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर रिपेयर के ऑर्डर भी यहां पहुंच रहे हैं।
रिहाई के बाद भी बन रहा सहारायहां प्रशिक्षण लेकर रिहा हुए कई कैदी अब फास्ट फूड, हथकरघा, कारपेंटरी और कार वॉशिंग जैसे कार्यों से अपनी आजीविका कमा रहे हैं। जेल में सीखा गया हुनर उनकी नई जिंदगी की मजबूत नींव बन रहा है। जेल प्रशासन का उद्देश्य है कि कैदी रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनें।जेल अधीक्षक विकास भटनागर के अनुसार, “हमारा प्रयास है कि कैदी यहां से खाली हाथ न जाएं, बल्कि उनके पास रोजगार का हुनर हो। इस दिशा में मिल रहे परिणाम उत्साहजनक हैं।डेयरी, बेकरी और कैंटीन बने कमाई के इंजनसबसे बेहतर प्रदर्शन डेयरी इकाई का रहा, जहां 77 कैदी कार्यरत रहे। इस इकाई ने 22.43 लाख रुपये का कारोबार कर 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। गोशाला में हर महीने 350 लीटर से अधिक दूध उत्पादन हो रहा है।