दैनिक खबरनामा 5 मार्च 2026 ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की कृषि व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से प्राकृतिक गैस की कमी पैदा हो गई है, जिससे देश में यूरिया उत्पादन प्रभावित हुआ है।इस संकट का सबसे ज्यादा असर पंजाब में देखा जा रहा है, जहां खरीफ सीजन से पहले ही यूरिया की भारी कमी हो गई है। धान और नरमा (कपास) की बुवाई के लिए यह समय बेहद अहम होता है, ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है।बताया जा रहा है कि गैस आपूर्ति में 30-35 प्रतिशत तक कमी आई है, जिसके कारण खाद कारखानों को मिलने वाली गैस में कटौती करनी पड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल यूरिया उत्पादन में 25-30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।पंजाब में हर साल लगभग 30-32 लाख टन यूरिया की खपत होती है, जिसमें से करीब 70 प्रतिशत धान की फसल में इस्तेमाल होता है। ऐसे में सप्लाई में कमी से उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर खाद न मिलने से धान की पैदावार में 15-20 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।वहीं, बठिंडा, मानसा और संगरूर जैसे जिलों में किसान अभी से यूरिया का स्टॉक जमा करने लगे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है। बढ़ते डीजल दाम और खाद की महंगाई से खेती की लागत भी बढ़ने की आशंका है।सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए रूस और मिस्र से खाद आयात के नए समझौते किए हैं और नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाकर जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव और गैस संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर पूरे देश की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल किसानों की सबसे बड़ी चिंता समय पर यूरिया की उपलब्धता को लेकर है।