दैनिक ख़बरनामा 11 मई 2026 एसएएस नगर (मोहाली), 11 मई 2026 पंजाब के गन्ना आयुक्त Dr. Amrik Singh ने किसानों से अपील की है कि गन्ने की फसल में अधिक उत्पादन और बेहतर चीनी रिकवरी के लिए संतुलित मात्रा में खादों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि गन्ना एक लंबी अवधि और अधिक पोषक तत्व लेने वाली फसल है, इसलिए सही समय पर सही मात्रा में खाद डालना बेहद जरूरी है।डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल को मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की आवश्यकता होती है। नाइट्रोजन फसल की तेज बढ़वार, हरे पत्तों और अधिक शाखाओं के विकास में मदद करती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा यूरिया का प्रयोग फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे कीट और बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है, फसल गिरने लगती है तथा गन्ने का वजन और चीनी रिकवरी दोनों घट जाते हैं।उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बीज वाली फसल में प्रति एकड़ 130 किलो और मूढ़ी फसल में 195 किलो यूरिया का प्रयोग किया जाए। यूरिया को एक साथ डालने की बजाय किस्तों में उपयोग करना बेहतर होता है। बीज वाली फसल में पहली किस्त पहले पानी के बाद और दूसरी मई-जून में डालनी चाहिए। वहीं मूढ़ी फसल में यूरिया की तीन बराबर किस्तें पहली गुड़ाई, दूसरी अप्रैल और तीसरी मई में डालने की सिफारिश की गई है।उन्होंने बताया कि फास्फोरस मजबूत जड़ों के विकास में सहायक होता है। यदि मिट्टी में इसकी कमी हो तो प्रति एकड़ 75 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट बुवाई के समय डालना चाहिए। वहीं पोटाश गन्ने की मोटाई, रस की गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।