दैनिक खबरनामा 26 अप्रैल 2026 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2024 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में राज्य सरकार की दशकों पुरानी नियुक्ति नीतियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया गया।कोर्ट ने 89 दिनों की नियुक्ति और फिर ब्रेक देकर दोबारा नियुक्त करने की व्यवस्था को शोषणकारी बताया। साथ ही यह भी कहा कि सरकार ने अदालतों के फैसलों से बचने के लिए विद्या उपासक, पैरा-टीचर, पीटीए और पैट शिक्षक जैसी नई श्रेणियां बनाकर नियमों को दरकिनार किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुबंध या अस्थायी नियुक्तियां असंवैधानिक हैं। कई मामलों में चहेतों को लाभ देने के लिए नियमों की अनदेखी भी सामने आई। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध कर्मचारियों को भी वेतन वृद्धि और पेंशन जैसे लाभ मिलने चाहिए तथा उनकी सेवा अवधि को पेंशन में जोड़ा जाना चाहिए। सरकार को एक आदर्श नियोक्ता की तरह व्यवहार करना चाहिए।
सरकार का तर्क था कि अनुबंध कर्मचारियों को प्रारंभिक तिथि से वरिष्ठता देने पर 21 वर्षों की वरिष्ठता सूचियां प्रभावित होंगी और वित्तीय बोझ बढ़ेगा। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे सरकार की विफलता बताया, जबकि विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि यह फैसला उनकी चेतावनी को सही साबित करता है।कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कर्मचारियों की अन्य शिकायतें बचती हैं, तो वे नई याचिकाएं दायर कर सकते हैं। यह फैसला अनुबंध कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।