दैनिक खबरनामा। शिमला, 8 जून 2026: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी भूमि पर वर्षों से काबिज छोटे और सीमांत किसानों तथा भूमिहीन परिवारों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में अतिक्रमण नियमितीकरण नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि, यह नीति केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद ही लागू हो सकेगी।
नई नीति के तहत सरकारी भूमि पर किए गए कब्जों को नियमित कराने के लिए आवेदकों को अपने दावे के समर्थन में कम से कम एक गवाह प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही संबंधित ग्रामसभा से अनुमोदन प्राप्त करना भी अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे वास्तविक पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी।
प्रदेश में करीब 1.67 लाख किसानों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किए जाने का अनुमान है। हालांकि, नीति का लाभ केवल उन्हीं किसानों और परिवारों को मिलेगा जिनकी कुल भूमि 20 बीघा से कम है। जिन लोगों के पास पहले से 20 बीघा से अधिक जमीन है, वे इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
कब्जाधारियों को यह साबित करना होगा कि वे लंबे समय से संबंधित भूमि का उपयोग खेती-बाड़ी या आजीविका के लिए कर रहे हैं। निर्धारित मानकों और कानूनी शर्तों को पूरा करने वाले मामलों में ही कब्जों को नियमित किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि प्रदेश के कई छोटे किसान और भूमिहीन परिवार वर्षों से सरकारी भूमि पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे परिवारों को कानूनी संरक्षण और स्थायित्व प्रदान करने के उद्देश्य से यह नीति तैयार की गई है। हालांकि, लाभ केवल पात्र और सत्यापित मामलों में ही दिया जाएगा।
मुख्य बिंदु
अतिक्रमण नियमितीकरण नीति-2026 को कैबिनेट की मंजूरी।
केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद होगी लागू।
एक गवाह और ग्रामसभा की मंजूरी अनिवार्य।
केवल 20 बीघा से कम भूमि वाले किसानों को मिलेगा लाभ।
करीब 1.67 लाख किसानों को राहत मिलने की संभावना।
लंबे समय से भूमि उपयोग का प्रमाण देना होगा।