दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 1 जून : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे के बीच भारतीय रिफाइनरियां अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति में आई अनिश्चितता के कारण कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने के साथ-साथ अपनी रिफाइनरियों को अलग-अलग गुणवत्ता वाले क्रूड को संसाधित करने के लिए तैयार कर रही हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण भारत को अपने पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से मिलने वाले कच्चे तेल में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में रिफाइनरियों को उन ग्रेड के तेल का उपयोग करना पड़ रहा है, जिनके लिए उनके संयंत्र मूल रूप से डिजाइन नहीं किए गए थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति कुछ हद तक उस दौर जैसी है जब यूक्रेन संकट के बाद भारतीय कंपनियों ने बड़ी मात्रा में रियायती रूसी तेल खरीदना शुरू किया था। उस समय भी रिफाइनरियों को अपनी प्रसंस्करण क्षमता और तकनीकी ढांचे में बदलाव करने पड़े थे।

तकनीकी सुधारों पर बढ़ा जोर

बदलते हालात में भारतीय रिफाइनरियां नई तकनीकों और उपकरणों के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। कंपनियां ऐसे समाधान तलाश रही हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल को संसाधित कर अधिक मांग वाले पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।

विशेष रूप से हाइड्रोक्रैकर जैसी इकाइयों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है ताकि बदलते कच्चे तेल के मिश्रण के अनुरूप बाजार की मांग पूरी की जा सके। इसके अलावा गैस-टू-केमिकल्स, ऑयल-टू-केमिकल्स, उच्च गुणवत्ता वाले लुब्रिकेंट बेस ऑयल, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथिलीन और डिलेड कोकिंग जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

खाड़ी देशों की रणनीति में भी बदलाव

विश्लेषकों का कहना है कि हॉर्मुज मार्ग पर निर्भर खाड़ी देशों में भी नई सोच विकसित हो रही है। सऊदी अरब सहित कई देश अपनी रिफाइनरियों के विस्तार और आधुनिकीकरण पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। वहीं कुवैत, कतर और इराक जैसे देश भविष्य में अपने निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त परियोजनाओं और वैकल्पिक व्यापार मार्गों पर विचार कर सकते हैं।

निवेश के रुख में बदलाव

क्षेत्रीय अस्थिरता का असर निवेश प्रवाह पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ खाड़ी देशों ने एशिया में प्रस्तावित निवेश योजनाओं की गति धीमी कर अपने घरेलू ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।

युद्ध के बाद खुल सकते हैं नए अवसर

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि संघर्ष के दौरान तेल और गैस से जुड़ी कई परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में हालात सामान्य होने के बाद मरम्मत, पुनर्निर्माण और नए उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े कारोबार में उल्लेखनीय अवसर पैदा हो सकते हैं।

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच भारतीय रिफाइनरियों की यह रणनीतिक तैयारी न केवल आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगी, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी प्रदान कर सकती है।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी का नया अध्याय शुरू, सीईपीए लागू होते ही निर्यातकों के लिए खुले बड़े अवसर

दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 1 जून : भारत और ओमान के बीच…
Share to :

अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: रडार और मानवरहित विमान नियंत्रण केंद्रों पर कार्रवाई, जवाब में सैन्य ठिकाने को बनाया निशाना

दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 1 जून :  अमेरिका और ईरान के बीच…
Share to :

अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन के प्रारंभिक समझौते पर सहमति, अंतिम मंजूरी बाकी

दैनिक खबरनामा नई दिल्ली, 29 मई : अमेरिका और ईरान के बीच…
Share to :

भारत-कनाडा व्यापार संबंधों को नई रफ्तार, निवेश मंच की शुरुआत; वर्षांत तक आर्थिक साझेदारी समझौते का लक्ष्य

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा में व्यापार, निवेश और कारोबारी…
Share to :