दैनिक खबरनामा | 23 अक्टूबर | हिसार
हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। हिसार सर्कल में स्थिति गंभीर बनी रही। रिपोर्ट के अनुसार, 355 क्षेत्रों में करीब 24 घंटे तक बिजली संकट रहा, जबकि कंट्रोल रूम में दर्ज लगभग 2,100 शिकायतों में से महज पांच का निपटारा हो पाया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से पेयजल समेत अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी असर पड़ा और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध
गुरुवार सुबह 8 बजे हिसार के विद्युत सदन स्थित एसई कार्यालय में 450 से अधिक बिजली कर्मचारी और इंजीनियर जुटे। प्रदर्शन में एसई, एक्सईएन, एसडीओ और जेई सहित विभिन्न पदों पर तैनात कर्मचारी शामिल हुए। उन्होंने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की।
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स साझा संघर्ष मोर्चा ने सरकार से इस लाइसेंस को रद्द करने की मांग की। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर 24 अक्टूबर को बैठक कर आंदोलन और हड़ताल जारी रखने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक करीब 97 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण बिजली व्यवस्था संभालने में दिक्कतें आईं।
कई घंटे बिजली बंद रहने से भड़के लोग
हिसार के सेक्टर-13 और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति लंबे समय तक ठप रहने से स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार देर शाम लोगों ने सब-स्टेशन के बाहर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थानीय निवासी जगदीश ने बताया कि दोपहर 12 बजे से रात करीब 8:30 बजे तक बिजली नहीं आई। इससे सेक्टर-13, सेक्टर-13 पार्ट-2 और सेक्टर-16-17 में रहने वाले हजारों लोग प्रभावित हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि बिजली अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उनकी कॉल का जवाब नहीं दिया गया।
लोगों ने सब-स्टेशन के बाहर सरकार और बिजली निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाए। हालात को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और सब-स्टेशन की सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो मुख्य मार्ग पर जाम लगाया जाएगा। इसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी प्रभावित, जनरेटर नहीं चला
बिजली संकट का असर विद्युत सदन के कार्यालयों और कंट्रोल रूम तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, कंट्रोल रूम में बिजली न होने से कामकाज प्रभावित हुआ और वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी। ठेकेदार के कर्मचारियों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद अस्थायी इंतजाम किया। इसके बाद कंप्यूटर कनेक्शन जोड़कर रिपोर्ट भेजने का काम दोबारा शुरू हो सका।
विद्युत सदन के कुछ कार्यालयों के लिए जनरेटर भी मंगवाया गया, लेकिन उसे संचालित करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया।
बिजली कटौती से पानी का संकट भी गहराया
लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से पानी की मोटरें बंद रहीं, जिसके चलते शहरी और ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई। कई स्थानों से बिजली व्यवस्था बाधित होने की शिकायतें मिलीं।
प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में गैबीपुर, अग्रोहा-नंगथला, मंगाली, चौधरीवास, आर्य नगर, जमालपुर, मिर्चपुर, खरड़, अलीपुर, हांसी रेलवे क्षेत्र, उमरा, बास, राजली और सदलपुर सहित कई इलाके शामिल बताए गए।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में नागोरी गेट, राजगुरु मार्केट, पुरानी सब्जी मंडी, सूर्य नगर, इंद्रा कॉलोनी, शांति नगर, आजाद नगर, पटेल नगर, जवाहर नगर, ऑटो मार्केट, पड़ाव चौक, मिल गेट, कैमरी रोड, सेक्टर-1 से 4, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और नागरिक अस्पताल के आसपास बिजली संकट की सूचना सामने आई।
24 अक्टूबर की बैठक पर टिकी निगाहें
गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के मुद्दे पर सरकार और बिजली कर्मचारियों के बीच विवाद बरकरार है। कर्मचारियों ने मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, हड़ताल के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अब 24 अक्टूबर को साझा संघर्ष मोर्चा की प्रस्तावित बैठक पर नजरें टिकी हैं। इस बैठक में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल, बिजली आपूर्ति सुचारु बनाए रखना और लंबित शिकायतों का निपटारा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।