नई दिल्ली (दैनिक खबरनामा ) 4 जून, 2026 पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच राहत भरी खबर सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संघर्ष को और विस्तार देने में अनिच्छा जताए जाने की खबरों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत से अधिक टूटकर 94.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 3.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में दोनों प्रमुख तेल सूचकांक 100 डॉलर से ऊपर बने हुए थे और संघर्ष के चरम दौर में कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई थीं।

बाजार में यह नरमी उस रिपोर्ट के बाद देखने को मिली जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों से संकेत दिया है कि हालिया छिटपुट घटनाओं के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम प्रभावी बना हुआ है। निवेशकों ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम होने के संकेत के रूप में लिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाएं कमजोर पड़ीं।

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईरान अमेरिकी सैनिकों या हितों को निशाना बनाता है तो संघर्षविराम समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। इस बीच अमेरिकी प्रशासन की ओर से इन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

पिछले दिनों ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष टकराव की घटनाओं ने वैश्विक बाजारों को चिंतित कर दिया था। ईरान द्वारा अमेरिकी परिसंपत्तियों को निशाना बनाने और जवाब में अमेरिकी कार्रवाई के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। ऐसे माहौल में संघर्षविराम के बने रहने के संकेत बाजार के लिए सकारात्मक साबित हुए हैं।

इधर, क्षेत्रीय स्तर पर भी कुछ सकारात्मक घटनाक्रम सामने आए हैं। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्षविराम लागू करने पर सहमति बनने की खबरों ने अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनने की उम्मीद बढ़ाई है। इससे ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावना मजबूत हुई है।

अमेरिका के भीतर भी युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पारित कर प्रशासन से या तो सैनिकों की वापसी अथवा आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की मांग की गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी सीनेट की स्वीकृति मिलनी बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और अमेरिका-ईरान संबंधों में होने वाले घटनाक्रम ही तय करेंगे कि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी या फिर एक बार फिर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।

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