दैनिक खबरनामा। सोलन, 12 जून: भारतीय सेना ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से शुक्रवार को कसौली छावनी से ‘सूर्य ग्रीन-हिमालयन ओडिसी’ इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अभियान की शुरुआत की। इस ऐतिहासिक अभियान को भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

टाटा ईवी के सहयोग और सूर्य कमांड के मार्गदर्शन में गोल्डन की डिवीजन द्वारा आयोजित यह अभियान हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अभियान के तहत टाटा के 10 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों का काफिला हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के दुर्गम एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरते हुए 11 दिनों में 1,663 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी करेगा। इसका समापन 22 जून को लेह स्थित ‘हॉल ऑफ फेम’ में होगा।

अभियान में छह टाटा हैरियर ईवी, तीन टाटा कर्व ईवी और एक टाटा पंच ईवी शामिल हैं। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा और हरित गतिशीलता को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, सैन्य-नागरिक संबंधों को सुदृढ़ करना तथा भारतीय सेना के जवानों के साहस और समर्पण को उजागर करना है।

इस अभियान का नेतृत्व गोल्डन की डिवीजन के मेजर अमन सिंह यादव कर रहे हैं। दल में भारतीय सेना के 10 जवान, टाटा ईवी के पांच प्रतिनिधि और दो डिजिटल कंटेंट क्रिएटर शामिल हैं। अभियान का प्रमुख लक्ष्य देश में स्वदेशी हरित तकनीक और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।

दुर्गम रास्तों से गुजरेगा काफिला

यह यात्रा स्पीति, लाहौल, हान्ले, चुशुल और तांग्त्से जैसे कठिन पर्वतीय क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। अभियान के दौरान काफिला दुनिया की कुछ सबसे ऊंची मोटरयोग्य सड़कों को पार करेगा, जिनमें 17,590 फीट ऊंचा चांग ला दर्रा और 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व का सबसे ऊंचा मोटरयोग्य दर्रा उमलिंग ला शामिल है। शून्य से नीचे तापमान और कम ऑक्सीजन वाले इन इलाकों में यह यात्रा वाहनों और प्रतिभागियों दोनों की सहनशक्ति की कठिन परीक्षा होगी।

रेजांग ला के वीरों को श्रद्धांजलि

यात्रा के दौरान अभियान दल ऐतिहासिक रेजांग ला युद्ध स्मारक पहुंचकर वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में 13 कुमाऊं रेजिमेंट के वीर सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।

स्थानीय युवाओं से संवाद करेगी टीम

अभियान के दौरान टीम विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों, युवाओं और विद्यार्थियों से संवाद कर पर्यावरण संरक्षण, जिम्मेदार परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता फैलाएगी। सेना के अधिकारियों के अनुसार यह पहल भारत सरकार के स्वच्छ गतिशीलता और स्वदेशी हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप

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