मध्य पूर्व में शांति समझौते को लेकर संशय बरकरार, रूबियो क्षेत्रीय सहयोगियों को मनाने में जुटे

दैनिक खबरनामा ब्यूरो। तेल अवीव/दुबई, 24 जून — इज़राइल के रक्षा मंत्री ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच हुए प्रारंभिक शांति समझौते को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो मध्य पूर्व के देशों को इस समझौते के समर्थन के लिए मनाने के प्रयास में जुटे हैं।

अमेरिका और ईरान ने पिछले सप्ताह युद्ध समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह युद्ध पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करने के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव डाल रहा था, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरती है।

हालांकि समझौते के कई पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। ईरान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता, होर्मुज़ जलडमरूमध्य का नियंत्रण और लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, जिससे इस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने दोहराया कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी। उनका कहना है कि उत्तरी इज़राइल के निवासियों की सुरक्षा के लिए वहां एक सुरक्षा क्षेत्र बनाया गया है।

तेल अवीव में एक सम्मेलन के दौरान काट्ज़ ने कहा, “इज़राइली सेना पूरी तरह तैयार है और हम पीछे नहीं हट रहे हैं। हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में लेबनान से वापसी नहीं होगी। फिलहाल अमेरिका की ओर से भी ऐसी कोई मांग नहीं की गई है।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब वाशिंगटन में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत इज़राइली सेना कुछ कब्जे वाले क्षेत्रों से हटकर नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंप सकती है।

मार्च की शुरुआत से इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है। इज़राइल का आरोप है कि हिजबुल्लाह ने ईरान के समर्थन में उस पर हमला किया था। दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम शांति समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम को प्रमुख शर्त बताया है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने अज़रबैजान की राजधानी बाकू में कहा, “लेबनान में युद्धविराम हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना ईरान में युद्धविराम। लेबनान में युद्ध का अंत और ईरान में युद्ध का अंत समान रूप से आवश्यक है।”

इस बीच दक्षिणी लेबनान में एक कार पर हुए इज़राइली ड्रोन हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई। इज़राइली सेना ने कहा कि वह इस घटना की जांच कर रही है। सेना ने यह भी बताया कि उसके वायुसेना विमानों ने दक्षिणी लेबनान में दो सशस्त्र हिजबुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाया।

क्षेत्रीय देशों को समझौते के लिए मनाने में जुटे रूबियो

मध्य पूर्व के कई देशों ने प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते पर संदेह जताया है। उनका मानना है कि यह समझौता ईरान के प्रति अत्यधिक नरम है, जिसमें लगभग 300 अरब डॉलर के फंड और कुछ प्रतिबंधों में राहत जैसी रियायतें शामिल हैं।

इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। रूबियो कुवैत और बहरीन की भी यात्रा कर रहे हैं। दोनों देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और हालिया युद्ध के दौरान वे ईरानी मिसाइल हमलों का सामना कर चुके हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को मुक्त की जाने वाली धनराशि का उपयोग अमेरिका से खाद्य सामग्री और चिकित्सा उपकरण खरीदने में किया जाएगा, जिससे अमेरिकी किसानों को लाभ मिलेगा। हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

परमाणु निरीक्षण और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी मतभेद

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद जारी हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अनिश्चित काल तक परमाणु निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई है, लेकिन तेहरान ने इस दावे का खंडन किया है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) प्रमुख राफेल ग्रॉसी के साथ कोई बैठक नहीं हुई है और फिलहाल उन परमाणु स्थलों तक पहुंच देने की कोई योजना नहीं है, जिन पर हाल में हमले हुए थे।

उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर केवल अंतिम समझौते के तहत और सभी प्रतिबंध हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने के बाद ही विचार किया जाएगा।

उधर, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है, जिसके चलते तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। हालांकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के दीर्घकालिक प्रबंधन को लेकर ईरान, ओमान और अन्य खाड़ी देशों के बीच चर्चा जारी है।

कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने बुधवार को ओमान की राजधानी मस्कट का दौरा किया, जहां जलडमरूमध्य के भविष्य के संचालन और प्रबंधन पर बातचीत हुई।

इस बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका को आश्वस्त किया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल, बीमा शुल्क या अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में हुए इस प्रारंभिक समझौते को अभी कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेबनान, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे मुद्दों पर जारी मतभेद यह संकेत देते हैं कि अंतिम समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी भी जटिल बना हुआ है।

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